अमेरिकी राजदूत ने यह बात रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और दूसरे शीर्ष अधिकारियों के साथ अपनी मीटिंग के बाद कही। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सर्जियो गोर ने कहा, “पिछले साल ही, अमेरिका और भारत ने 10 साल का डिफेंस पैक्ट साइन किया था, जिससे हमारी रक्षा साझेदारी काफी गहरी होगी। संयुक्त अभियान जारी रहेंगे, और अतिरिक्त सेल्स भी चल रही हैं। यह एक मजबूत रिश्ता है! रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह हमारी मेजबानी करने के लिए धन्यवाद।”
इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार (25 जनवरी) को अमेरिकी राजदूत के साथ तीन सदस्यों वाली यूएस कांग्रेसनल डेलीगेशन से मुलाकात की। इस डेलीगेशन में दो रिपब्लिकन और एक डेमोक्रेट शामिल थे। मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा हुई।
ईएएम जयशंकर ने अमेरिकी डेलीगेशन के साथ इस मुलाकात को अच्छा बताते हुए एक्स पर लिखा, “भारत-अमेरिका संबंधों, इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन विवाद के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की। कांग्रेसनल बातचीत हमेशा हमारे रिश्ते का एक अहम पहलू रही है।”
अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि बातचीत प्रोडक्टिव रही और सुरक्षा, व्यापार और जरूरी तकनीक के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर फोकस रही। अक्टूबर 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ मलेशिया में आसियान रक्षा मंत्रियों की दूसरी बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के मौके पर मिले।
इस दौरान, भारत और अमेरिका ने 10 साल की रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किया था। अधिकारियों के मुताबिक यह पहले से ही मजबूत रक्षा संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत करेगी।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “2025 का फ्रेमवर्क अगले 10 सालों में साझेदारी को और बदलने के लिए एक नया अध्याय है। इसका मकसद रक्षा सहयोग को गहरा करने के लिए एक यूनिफाइड विजन और पॉलिसी डायरेक्शन देना है।”
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में जारी रफ्तार की तारीफ की और सभी स्तंभों पर आपसी फायदे वाली साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीट हेगसेथ ने दोहराया कि रक्षा सहयोग में अमेरिका के लिए भारत एक प्राथमिकता वाला देश है और वॉशिंगटन एक फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्रालय ने आगे कहा, “भारत और अमेरिका मिलिट्री-टू-मिलिट्री अभ्यास और गतिविधि, जानकारी साझा करना, एक जैसी सोच वाले क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग, रक्षा उद्योग, विज्ञान और तकनीकी सहयोग और रक्षा सहयोग मैकेनिज्म के जरिए रक्षा संबंधों को बढ़ाना और गहरा करना जारी रखे हुए हैं।”
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