भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने चीन के राजदूत याओ वेन को तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा कराया है। यह इलाका भारत के रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है उसके काफ़ी नजदीक स्थित है। इस कदम को क्षेत्रीय भू-राजनीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
Chinese Ambassador to Bangladesh Yao Wen meets Yunus's NSA Dr Khalilur Rahman. Discussed Teesta River project. Bangladesh readout says Chinese Amb "informed that he would visit the Teesta project area"
— Sidhant Sibal (@sidhant) January 18, 2026
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के अनुसार, चीनी राजदूत का यह दौरा तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना के लिए तकनीकी आकलन तक सीमित था। सरकार के अनुसार, यह दौरा किसी राजनीतिक या सैन्य उद्देश्य से नहीं, बल्कि परियोजना से जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए किया गया।
बता दें हाल के महीनों में मोहम्मद यूनुस के बयानों ने विवाद खड़ा किया है। दिसंबर में यूनुस द्वारा चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को स्थलरुद्ध अर्थात लैंडलॉक्ड बताए जाने वाली टिप्पणियों के बाद व्यापक आलोचना हुई थी। इन बयानों के बाद ढाका समेत कई बड़े शहरों में हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भारतीय राजनयिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया था, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव और गहरा गया।
चीनी राजदूत याओ वेन के साथ बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन भी रंगपुर के तेपामधुपुर तालुक शाहबाजपुर स्थित तीस्ता परियोजना क्षेत्र पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान (टीएमपी) को जल्द से जल्द लागू करने को लेकर उत्सुक है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तकनीकी आकलन पूरा होते ही परियोजना के कार्यान्वयन की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
इससे पहले सप्ताहांत में चीनी राजदूत ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान से भी मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद यूनुस के प्रेस विंग ने बयान जारी करते हुए कहा, “दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बांग्लादेश तथा चीन के बीच दीर्घकालिक मित्रता और विकास सहयोग की पुष्टि की।” बयान में आगे कहा गया, “चर्चा में तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना तथा प्रस्तावित बांग्लादेश–चीन मैत्री अस्पताल शामिल रहे। इस संदर्भ में चीनी राजदूत ने तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा करने की जानकारी दी और चल रहे तकनीकी आकलन को शीघ्र पूरा करने के लिए चीन की प्रतिबद्धता दोहराई।”
गौरतलब है कि पिछले वर्ष यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को लैंडलॉक्ड बताते हुए चीन से भारतीय क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाने की बात कही थी, जिस पर नई दिल्ली ने कड़ी आपत्ति जताई थी। हालांकि, बाद में एक अन्य बयान में यूनुस ने नेपाल की संसद के उपसभापति इंदिरा राणा से मुलाकात के बाद क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग की बात भी कही। सरकार की ओर से एक्स पर जारी पोस्ट में कहा गया, “यूनुस ने बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों के बीच एकीकृत आर्थिक रणनीति का आह्वान किया है, जिसमें जलविद्युत, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क संपर्क में सीमा-पार सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया गया है।”
इन घटनाओं के बीच तीस्ता परियोजना क्षेत्र में चीनी राजदूत की मौजूदगी को लेकर भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई बहस शुरू हो गई है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके संभावित असर को लेकर नजरें टिकी हुई हैं।
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