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घर गिरवी रखा, बैंक लोन लिया, सारी संपत्ति बर्बाद कर दी; अमेरिका में अवैध तरीकों से जाने वालों का दर्द !

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अमेरिका में अप्रवसियों के लिए नए कानून आने के बाद से अमेरिका में रह रहे भारतियों में दहशत का माहौल है। 5 फरवरी को अमेरिका के मिलिट्री विमान में वापस आए 104 भारतियों की आप बीती सुनकर उनकी स्थिति बेहद निराशाजनक लगती है। देर रात भारत पहुंचे इन भारतियों से जब मीडिया के संयोजकों ने जब बात की तो साफ़ समझ आ रहा था कि वे सदमे की वजह से कुछ बोल नहीं पा रहे थे। 6 फरवरी तक जब हालत सामान्य लगने लगे तो कुछ लोगो में मीडिया से बात करके अपनी आप बीती सुनाई। महाराष्ट्र के नागपुर में रहने वाले हरप्रीत लालिया उर्फ़ रोशन ने बताया कि उन्हें कनाडा जाने के और वहां अच्छे पैसे कमा पाने के जो वायदे किये गए थे वो विदेश पहुँचते ही टूटते नज़र आने लगे।

इन्ही वायदों की वजह से वे अपने घर के सोने के ज़ेवर, ज़मीन आदि संपत्ति गिरवी रखकर अमेरिका – मेक्सिको सीमा पर पहुँचे थे। लेकिन वहां से शुरू हुआ वो भयानक सपना जिसे सोचकर वे अभी भी सदमे में हैं। विदेश में केवल 62 दिन रहकर वापस आने वाले हरप्रीत ने बताया वह अवैध रूप से बॉर्डर पार कराने वाले माफिया वहां बहुत सक्रीय हैं और उन्होंने अपने एक साथी को उनके हाथों मौत के घाट उतरते भी देखा था।

उन्होंने विस्तार से बताया कि, वे गुरुदासपुर में एक एजेंट से मिले, जिसने उन्हें 18 लाख की इनिशियल फी बताई जिससे वो उनका टूरिस्ट प्रोफाइल बनाएगा जो कनाडा पहुँचने के बाद वर्क परमिट में तब्दील हो जायेगा। भारत से ईजिप्ट और वहां से उन्हें स्पेन में कुछ दिन रहने को कहा गया। उसके बाद अमेरिका – मेक्सिको सीमा तक पहुँचने में भी उन्हें कई दिन लग गए। जनवरी की शुरुआत में हरप्रीत और उनके साथ जा रहे गुजरात के बाकी लोग गिरफ्तार कर लिए गए, जिन्हे फिर सेन डिएगो की जेल में रखा गया। यहां उनके साथ आतंकवादियों जैसा सलूक किया गया। 12 दिन जेल में बिताने के बाद 6 फरवरी को वे घर पहुंचे हैं।

जीवन भर साथ रहने वाली ये भयानक यादें और वित्तीय कर्ज़े की चपेट आ चुके हरप्रीत अकेले नहीं हैं, लगभग सभी वापस आये भारतियों की यही कहानी है। गुजरात की रहने वाली एक महिला के परिवार वालों ने मीडिया से बात करने पर बताया कि उनकी बेटी यूरोप गयी थी, वहां से वह अमेरिका कब और कैसे पहुँच गयी, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है, बस इस बात का संतोष है कि वो सही सलामत घर वापस आ गयी है।

अमृतसर में उतरे विमान में से 33 लोग गुजरात के हैं जिसमे महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सलेमपुर गाँव के रहने वाले दलेर सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पंजाब से अमरीका जाने के सफर में उन्होंने घर गिरवी रखने, बैंक लोन लेने और अपनी लगभग सारी संपत्ति बर्बाद होते देखी है। पंजाब पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी समस्या है कि उन एजेंट्स का पता लगाया जाए जो डंकी रास्ते से भारतियों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजते हैं।

इस मामले में 23 साल के आकाशदीप की कहानी बड़ी दिलचस्प है जिन्होंने बताय कि भारत से डंकी रस्ते से जाना वाले सभी भारतियों का अड्डा दुबई होता है। आकाशदीप ने बताय कि उनके एजेंट ने उन्हें दुबई से अमेरिका पहुँचाने के लिए 45 लाख रूपए मांगे थे और वायदा किया था कि उन्हें कानूनी तरीके से अमेरिका भेज देंगे लेकिन दुबई पहुँचने के बाद उनकी 6 महीने की भयावह यात्रा शुरू हुई, जिसमे उन्हें डंकी रास्ते से पहले ब्राज़ील, वहां से बोलीविया, पेरू, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ, होंडुरस, ग्वाटेमाला, मेक्सिको होते हुए अमेरिका पहुँचाने लगे जहा उन्हें बॉर्डर पर ही पकड़ लिया गया। 8 महीने मुश्किलें झेलते हुए जब वह अमेरिकी बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे उससे पहले ही उनके सपने टूट गए और सीमा पर बने जेल में उन्हें 20 दिन रहना पड़ा जिसके बाद वे 5 फरवरी को हथकड़ियों में बंधकर वापस आये हैं।

लुधिअना की 21 साल की मुस्कान ने बताया कि वह भी यूके पढ़ने गयी थी जिसका उनके पास वैध पासपोर्ट और वीज़ा है। वह अपने दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने मेक्सिको गयी थी जहां पर उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनका कहना है कि उन्होंने बॉर्डर पार भी नहीं किया था और वो लोग अमेरिका टूरिस्ट वीज़ा पर ही जाने वाले थे लेकिन मेक्सिको पुलिस ने गिरफ्तार करके उन्हें कैलिफ़ोर्निया के अधिकारीयों के हवाले कर दिया जहाँ से उन्हें भारत भेज दिया गया।

इन सभी मामलों में सबसे बड़ी मुश्किल है लोगो के साथ हुए धोखे की जिसके वजह से उनके पैसे, उनकी संपत्ति सब कुछ उनसे सिर्फ एक सपने की आड़ में छिन गया। अपना सब कुछ लुटा चुके इन भारतियों ने बताया कि विमान में वापस आते समय बच्चों के अलावा सभी को ज़ंजीरें बाँधी गयी थी और पूरी विमान यात्रा के दौरान उन्हें एक बार भी नहीं खोला गया था।

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विदेश मंत्री के अनुसार यह पूरा प्रकरण अमेरिका के नियमों के अनुसार ही हुआ था और भारत सरकार लगातार इस पर अमेरिकी सरकार के साथ बात चीत कर रही है ताकि भारतीयों को मानवीय रूप से वापस लाया जा सके। दौरान प्रदेशों की पुलिस और राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारी इन सभी एजेंट्स और उनके गिरोह को पकड़ने में लगे हुए हैं जिनकी वजह से इन सभी भारतियों को अवैध तरीके से अमेरिका पहुँचाया गया था। सरकार ने देश को आश्वासन दिया है कि इस मामले की पुख्ता जांच होगी और वीज़ा के मामले में वैध रूप से जाने वाले भारतियों के लिए प्रतिबद्धताएं भी कम की जाएँगी ताकि उन्हें एजेंट्स की आवश्यकता ना पड़े।

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