अमेरिकी एयरमैन को बचाने के लिए CIA ने ऐसे दिया ईरान को धोखा

हाई-रिस्क ऑपरेशन

अमेरिकी एयरमैन को बचाने के लिए CIA ने ऐसे दिया ईरान को धोखा

This is how the CIA deceived Iran to save a US airman.

ईरान के दुर्गम पहाड़ों में फंसे एक अमेरिकी एयरमैन को बचाने के लिए अमेरिका ने जिस तरह का ऑपरेशन चलाया, उसने इसे किसी हॉलीवुड थ्रिलर जैसा बना दिया। करीब 7,000 फीट ऊंची ज़ाग्रोस पर्वतमाला में छिपे इस एयरमैन को निकालने के लिए केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) ने ईरानी सुरक्षा बलों को धोखे में रखा।

यह ऑपरेशन लगभग 36 घंटे तक चला, जिसमें जमीनी स्तर पर विशेष बलों की कार्रवाई के अलावा खुफिया स्तर पर गुमराह करने की रणनीति अपनाई गई। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान में जानबूझकर गलत सूचना फैलाई कि एयरमैन को ईरान द्वारा खोज लिया गया है और उसे जमीन के रास्ते बाहर ले जाया जा रहा है। अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी ईरानी सर्च ऑपरेशन का ध्यान असली लोकेशन से हटाया जा सके।

घटना की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को दक्षिण-पूर्वी ईरान में मार गिराया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पायलट और वेपन सिस्टम्स ऑफिसर दोनों सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। पायलट को कुछ ही घंटों में बचा लिया गया, हालांकि इस दौरान रेस्क्यू मिशन पर हमला भी हुआ और ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर के कुछ क्रू सदस्य घायल हो गए।

दूसरी ओर, वेपन सिस्टम्स ऑफिसर 36 घंटे तक पहाड़ों में छिपा रहा। उसने खुद को बचाने के लिए सीमित संचार और सर्वाइवल तकनीकों का इस्तेमाल किया। उसने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए बीकन का कम इस्तेमाल किया और सुरक्षित एन्क्रिप्टेड डिवाइस के जरिए संपर्क बनाए रखा।

इस दौरान ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसिज़ जैसे अर्धसैनिक बलों ने व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। ईरानी सरकार ने स्थानीय लोगों से दुश्मन पायलट को जिंदा या मुर्दा खोजने की अपील की और इनाम की भी घोषणा की। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि स्थानीय कबीलों ने अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर फायरिंग की, जिससे ऑपरेशन और जटिल हो गया।

इसी बीच CIA ने अपने धोखे के ऑपरेशन को तेज किया। दी न्यू यौर्क टाइम्स और एक्सिऑस की रिपोर्ट्स के अनुसार, एजेंसी ने झूठी सूचना फैलाई कि एयरमैन को ढूंढ लिया गया है और उसे दूसरी दिशा में ले जाया जा रहा है। इससे ईरानी बलों का ध्यान भटक गया और अमेरिकी टीम को असली लोकेशन तक पहुंचने का समय मिल गया।

जब एयरमैन की सटीक लोकेशन की पुष्टि हुई, तो जानकारी पेंटागन और व्हाइट हाउस तक पहुंचाई गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेस्क्यू ऑपरेशन को मंजूरी दी और बाद में इसकी सफलता की पुष्टि की।

शनिवार रात अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने एयरमैन के पास पहुंचकर उसे निकालने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान A-10 वार्थोग जैसे लड़ाकू विमानों ने हवाई सुरक्षा दी और आगे बढ़ रही ईरानी टुकड़ियों पर हमला किया। भारी गोलीबारी के बीच यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

हालांकि मिशन में कई चुनौतियां भी सामने आईं। वाल स्ट्रीट जरनल के अनुसार, दो MC-130J विमान तकनीकी कारणों से फंस गए, जिन्हें बाद में नष्ट करना पड़ा। इसके अलावा, इजराइल की खुफिया एजेंसियों से भी सहयोग मिलने की बात सामने आई, हालांकि सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया गया।

रेस्क्यू के बाद ईरान ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी विमान को मार गिराया है, लेकिन इस पर अमेरिकी पक्ष ने विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी। अमेरिकी अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को हाल के वर्षों के सबसे कठिन स्पेशल मिशन्स में से एक बताया है।

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