एक विद्यार्थी जिसने स्कूल के दिनों में ही सफलता के साथ इंस्टाग्राम चैनल चलाना शुरू किया, विज्ञान विषय को अपना जीवन समर्पित किया। दसवीं कक्षा पूरी होने से पहले उसने “सनातन धर्म ” पर एक पुस्तक लिखी। 18 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले उसने दो और पुस्तकें लिख डालीं। उसकी किताबें हज़ारों में बिकती हैं। ये किताबें क्रॉसवर्ड की अलमारियों पर भी दिखाई देती हैं। यह अद्भुत उपलब्धि युवा विवान कारुळकर ने हासिल की।
“नवभारत” के विवान कारुळकर सिर्फ़ किशोरवय में ही प्रतिभा के धनी साबित हुए। 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने NEOs (Near Earth Objects) पर एक पेटेंट प्राप्त किया और इस उपलब्धि के साथ दुनिया के सबसे कम उम्र के पेटेंट धारकों में शामिल हो गए।
16 वर्ष की आयु में विवान ने अपनी पहली पुस्तक “सनातन धर्म : समस्त विज्ञान का सच्चा स्रोत” लिखी, जिसमें 46 अध्यायों के माध्यम से उन्होंने पश्चिमी विज्ञान के अनेक आविष्कारों को वेदों में पहले से निहित ज्ञान से जोड़कर समझाया। उनका मानना है कि आधुनिक पश्चिमी विज्ञान वेदों की देन है। यह पुस्तक अयोध्या में राम मंदिर के प्राणप्रतिष्ठा समारोह के दौरान श्री चंपत राय (ट्रस्ट के महासचिव) द्वारा गर्भगृह में रामलला के चरणों में अर्पित की गई।
17 वर्ष की उम्र में विवान ने अपनी दूसरी पुस्तक “सनातन धर्म : समस्त प्रौद्योगिकी का वास्तविक आधार” लिखी। इसका विमोचन 15 नवंबर 2024 को दिल्ली में भारतीय शिक्षा मंडल के कार्यक्रम में हुआ, जहां मुख्य अतिथि थे, जिसमें परम पूज्य सरसंघचालक श्री मोहनजी भागवत, इसरो के अध्यक्ष श्री एस. सोमनाथ, और नोबेल विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी आदि उपस्थित हुए।
18 वर्ष की आयु में एलन मस्क से प्रेरित होकर विवान ने अपनी तीसरी पुस्तक “Elon Musk: The Man Who Bends Reality” लिखी, जिसे उन्होंने 28 जून 2025 को एलन मस्क के जन्मदिन पर प्रकाशित किया।
इसकी मराठी संस्करण का विमोचन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और गुजराती संस्करण का विमोचन केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटील ने किया।
वर्ल्ड रेकॉर्ड्स यूनिवर्सिटी ने विवान को सनातन धर्म पर पुस्तक लिखने वाले सबसे युवा लेखक के रूप में सम्माननीय डॉक्टरेट (Honoris Causa) की उपाधि दी।
वह अपने यूट्यूब चैनल @VivaansProudcast पर सनातन धर्म और विज्ञान पर आधारित विचार साझा करते हैं। वे सिद्धार्थ कन्नन और Free Press Journal के पॉडकास्ट पर भी आमंत्रित हो चुके हैं, और CNN ने भी उनके प्रयासों की सराहना की है। मशहूर अभिनेता मुकेश खन्ना ने भी उनसे विज्ञान और अध्यात्म पर बातचीत की।
उनका Instagram पेज “Sanatanitatva” एक लाख से अधिक अनुयायियों वाला लोकप्रिय प्लेटफ़ॉर्म है।
प्रमुख सम्मान और उपलब्धियां:
- विवान को संयुक्त राष्ट्र (UN) में विशेष आमंत्रण मिला, जहां उन्होंने अपनी पुस्तक प्रस्तुत की और उसके विचार Security Council Hall में समझाए।
- ब्रिटेन की रॉयल फैमिली ने उन्हें Prestigious Badge और Royal Coin देकर मानद सदस्य घोषित किया।
- ब्रिटिश प्रधानमंत्री किअर स्टार्मर ने सार्वजनिक मंच पर विवान की पुस्तक का उल्लेख किया और उन्हें 10 Downing Street बुलाया।
- यूके के मंत्री गेरेथ थॉमस ने House of Commons में विवान को मोमेंटो और बैज प्रदान किया — यह सम्मान पाने वाले वे सबसे युवा भारतीय बने।
- लंदन हॅरो के मेयर सलीम चौधरी और डिप्टी मेयर अंजना पटेल ने उन्हें सम्मानित किया।
- विवान की पुस्तक को स्विट्ज़रलैंड के वर्ल्ड कम्युनिकेशन फोरम, स्विस व ब्रिटिश संसद, बॉस्टन यूनिवर्सिटी, लॉस एंजेलिस, न्यूयॉर्क, आयरलैंड, नेपाल, और श्रीलंका जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर प्रदर्शित किया गया।
- भारतीय सेना ने भी विज्ञान व साहित्य में विवान के योगदान की सराहना की और उन्हें Medal of Appreciation से सम्मानित किया।
- भाजपा मुख्यालय के राष्ट्रीय ग्रंथालय में उनके पुस्तक को प्रधानमंत्री की पुस्तक के साथ रखा गया| ऐसा करने वाले वे सबसे युवा लेखक बने।
- विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार श्री संजीव सान्याल ने विवान के कार्य की प्रशंसा की।
- श्री श्री रविशंकर, स्वामी गोविंद देव गिरीजी, चिन्ना जियार स्वामी, आचार्य महाश्रमणजी, और नयपद्मसागरजी महाराज ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
- पुस्तक का पुनर्प्रकाशन महाराष्ट्र के माजी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, राज्यपाल रमेश बैंस, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, और एनएसई के एमडी-सीईओ आशीष चौहान के हाथों हुआ।
- एलआईसी, डीमार्ट और कई शीर्ष औद्योगिक संस्थाओं के प्रमुखों ने भी उनके प्रयासों की प्रशंसा की।
विवान, शीतल और प्रशांत कारुळकर के सुपुत्र हैं| दोनों ही प्रसिद्ध उद्यमी और समाजसेवी हैं। कारुळकर परिवार चार पीढ़ियों से संघ परिवार से जुड़ा रहा है और राष्ट्र निर्माण में योगदान देता आया है।
आज विवान कारुळकर की उपलब्धियां न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, बल्कि यह प्रमाण हैं कि सनातन परंपरा और आधुनिक विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
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