लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेता पीयूष गोयल पहली बार हमारे कार्यालय आए थे। वे उत्तर मुंबई से चुनाव मैदान में उतरे थे और हमारा कार्यालय भी उसी संसदीय क्षेत्र में है। हम “न्यूज़ डंका” नाम से एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पीयूष जी ने अपनी पहली इंटरव्यू न्यूज़ डंका को दी थी। इसके बाद वे कई बार हमारे कार्यालय आए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें वाणिज्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है। आज जब दुनिया में ट्रंप टैरिफ को लेकर हलचल मची हुई है, ऐसे समय में कई महत्वपूर्ण देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर उन्होंने भारत की स्थिति को मजबूत किया है।
भाजपा के पास शिक्षित और सक्षम नेताओं की एक बड़ी टीम है। मोदी की टीम में कई ऐसे नेता हैं, जिनमें पीयूष जी का नाम विशेष रूप से लिया जाना चाहिए। मोदी के साथ काम करना आसान नहीं है। जब आपका नेता दिन में 18 घंटे काम करता हो, तो सहयोगियों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। 75 वर्ष की उम्र में भी यदि मोदी छुट्टी नहीं लेते, तो उनके साथ काम करने वालों को भी घड़ी और कैलेंडर देखने का समय नहीं मिलता।
पीयूष गोयल के पिता वेद प्रकाश गोयल भाजपा के दिग्गज नेता थे और कई वर्षों तक पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे। उनकी माता चंद्रकांता गोयल भाजपा की विधायक थीं। इसलिए घर का माहौल पूरी तरह भाजपा के विचारों से भरा हुआ था। आज दोनों इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कठोर अनुशासन में ही पियूष जी का व्यक्तित्व तैयार हुआ।
हालांकि उनके पिता बड़े नेता थे और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में काम करते थे, लेकिन पियूष जी के स्वभाव में कभी अहंकार नहीं आया। वे हमेशा मुस्कुराते रहते हैं। उनका बोलने का अंदाज बेहद सौम्य होता है, लेकिन विचारों में दृढ़ता साफ दिखती है।
कभी-कभी वे कितनी कठोर भूमिका ले सकते हैं, इसकी झलक अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं में देखने को मिली। उन्होंने साफ कहा था–“अमेरिका द्वारा दी गई डेडलाइन की हमें कोई चिंता नहीं है। जब हमें लगेगा कि यह समझौता भारत के हित में है, तभी उस पर मुहर लगेगी। कृषि और डेयरी हमारे लिए रेड लाइन हैं और उनका उल्लंघन कोई नहीं कर सकता।”
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत को फिलहाल रोकने का फैसला लिया है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
जब अमेरिका ने टैरिफ हथियार का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया, तब पीयूष जी ने भारत के निर्यात को विविध देशों में फैलाने की रणनीति अपनाई और उसे सफल भी किया। अमेरिका के साथ बातचीत में गतिरोध के बावजूद भारत ने यूके और यूरोपीय संघ के साथ समझौते आगे बढ़ाए। कई अन्य देशों के साथ भी चर्चा जारी है। भारत की ताकत को वे अच्छी तरह समझते हैं और उसे दुनिया के सामने मजबूती से रखने का काम उन्होंने किया है।
कई नेताओं ने उन्हें एक “टफ नेगोशिएटर” के रूप में अनुभव किया है।
एक व्यवसायी के तौर पर मुझे उनके काम की सबसे ज्यादा प्रशंसा इस बात के लिए है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में भारत की स्थिति को जिस मजबूती से रखा है। पीयूष जी ऐसे कुशल कूटनीतिज्ञ हैं जो दुनिया को भारत की शर्तों पर व्यापार करने के लिए तैयार करते हैं। कई दशकों से लंबित समझौते उन्होंने कम समय में पूरे किए, लेकिन साथ ही भारत के उद्योगों और श्रमिकों के हितों की रक्षा भी की।
अमेरिका जैसी महाशक्ति या यूरोपीय संघ के साथ बातचीत करते समय भी उन्होंने हमेशा “मजबूत स्थिति से संवाद” किया है। उनका स्पष्ट मत रहा है– “हम किसी के दबाव में या जल्दबाजी में समझौता नहीं करेंगे। समझौता तभी होगा जब वह भारत के लिए न्यायसंगत और संतुलित होगा।” यह रुख हर भारतीय को गर्व महसूस कराता है।
हमारे कार्यालय में हुई मुलाकातों के दौरान मैंने उनकी एक खासियत को बहुत करीब से देखा – वह है बारीकियों पर ध्यान। पीयूष जी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, इसलिए उन्हें आंकड़ों और नियमों की गहरी समझ है। उनका मानना है कि अगर देश का विकास करना है, तो केवल सपने देखने से काम नहीं चलेगा; उन सपनों को साकार करने के लिए सूक्ष्म योजना भी जरूरी है।
देश के व्यापार, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर चर्चा करते समय वे पूरे उत्साह में आ जाते हैं। उनके पास कई नई और दूरदर्शी सोच होती है। मुंबई से होने के कारण उनसे बातचीत में एक खास मराठी अपनापन भी महसूस होता है। वे उद्योग और व्यापार जगत की नब्ज को समझने वाले नेता हैं।
पीयूष गोयल के पास भविष्य को देखने की स्पष्ट दृष्टि है। उनका मानना है कि राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और भारत को “विकसित भारत 2047” की दिशा में आगे बढ़ाने का साधन है। भारत के भविष्य को आकार देने वाले नेताओं में उनका योगदान निश्चित रूप से उल्लेखनीय माना जाएगा।
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