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भारत पर फिर बरसे ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो, कहा- ‘भारत सत्य को नहीं झेल सकता’

वित्त मंत्री सीतारमन ने दिया जवाब,"चाहे रूसी तेल हो या कुछ और, यह हमारा निर्णय है कि हमें कहाँ से खरीदना है।"

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और उनकी सरकार में ट्रेड एवं मैन्युफैक्चरिंग मामलों के वरिष्ठ सलाहकार रहे पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत पर तीखा हमला बोला है। नवारो ने शुक्रवार (5 सितंबर)को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर भारत पर “सबसे ऊँचे टैरिफ” लगाने का आरोप लगाया, जिसके चलते अमेरिकी नौकरियों पर असर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत केवल मुनाफे के लिए रूस से तेल खरीद रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिल रहा है।

नवारो ने लिखा, “भारत के सबसे ज़्यादा टैरिफ़ से अमेरिकी नौकरियाँ खत्म हो रही हैं। भारत रूसी तेल सिर्फ़ मुनाफ़े के लिए खरीदता है/राजस्व रूसी युद्ध मशीन को पोषित करता है। यूक्रेनियन/रूसी मर रहे हैं। अमेरिकी करदाताओं को ज़्यादा भुगतान करना पड़ रहा है।” इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत सच्चाई बर्दाश्त नहीं कर सकता।

इससे एक दिन पहले ही अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया था। उस समय नवारो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को मोदी का युद्ध करार दिया था और कहा था कि शांति का रास्ता आंशिक रूप से नई दिल्ली से होकर गुजरता है।

हालांकि आलोचकों ने नवारो के इन बयानों को दोहरा मापदंड करार दिया है। उनका कहना है कि यूरोप और अमेरिका दोनों ही रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं। स्वयं ट्रंप ने अलास्का शिखर सम्मेलन में व्लादिमीर पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया था। वहीं अमेरिका अब भी रूस से उर्वरक और रेयर अर्थ खनिज आयात करता है, जबकि यूरोपीय संघ भारी मात्रा में रूसी प्राकृतिक गैस पर निर्भर है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच टैरिफ और ऊर्जा आयात को लेकर तनातनी जारी है। अमेरिका का कहना है कि रूसी तेल से होने वाली आमदनी युद्ध को वित्तीय मदद दे रही है, जबकि भारत का तर्क है कि उसकी खरीदारी पूरी तरह आर्थिक और व्यावसायिक जरूरतों पर आधारित है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार (5 सितंबर)को इस मुद्दे पर स्पष्ट किया, “चाहे रूसी तेल हो या कुछ और, यह हमारा निर्णय है कि हमें कहाँ से खरीदना है। हमें वही स्रोत चुनना होगा जो हमारी जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से पूरा करे और हम उसी से खरीदेंगे।”

इस बीच ट्रंप ने तनाव को कम करने की कोशिश की और भारत-अमेरिका संबंधों को विशेष बताया। उन्होंने एक दिन पहले ही यह भी कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस दोनों को चीन के हाथों खो दिया है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस सकारात्मक आकलन की गहराई से सराहना करते हैं और उसका पूरा-पूरा प्रत्युत्तर देते हैं।

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