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मचाडो ने दी भेंट: ट्रंप को मिला ‘मनचाहा’ नोबेल शांति पुरस्कार—लेकिन क्या सच में?

जानें नियमों की हकीकत

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा एक असामान्य घटनाक्रम के चलते फिर चर्चा में है। 16 जनवरी को वे औपचारिक रूप से नोबेल विजेता तो नहीं बने, लेकिन वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में उनसे मुलाकात के दौरान अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक उन्हें भेंट किया। मचाडो ने इसे ट्रंप के हमारी आज़ादी के प्रति प्रतिबद्धता के सम्मान के रूप में बताया। इसके बाद सवाल उठ खड़ा हुआ, क्या नोबेल पुरस्कार को किसी और को सौंपा या स्थानांतरित किया जा सकता है?

मचाडो को यह पुरस्कार पिछले दिसंबर अंधकार के बीच लोकतंत्र की लौ जलाए रखने के लिए दिया गया था। पुरस्कार की घोषणा करते समय नोबेल समिति ने उनके वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए अथक प्रयास और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर न्यायपूर्ण व शांतिपूर्ण संक्रमण के संघर्ष की सराहना की थी। व्हाइट हाउस में पदक सौंपते समय मचाडो ने कहा कि यह ट्रंप के प्रति उनकी हमारी स्वतंत्रता के प्रति उनकी अनूठी प्रतिबद्धता के लिए है। उन्होंने अमेरिकी इतिहास का संदर्भ देते हुए जॉर्ज वॉशिंगटन, मार्क्विस द ला फायेत्ते और सिमोन बोलिवार की एक ऐतिहासिक कथा भी साझा की और ट्रंप को वॉशिंगटन का वारिस बताया।

डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा कि मचाडो ने “मेरे द्वारा किए गए काम के लिए अपना नोबेल शांति पुरस्कार मुझे प्रस्तुत किया। आपसी सम्मान का यह एक अद्भुत संकेत है।” रॉयटर्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप पदक अपने पास रखने का इरादा रखते हैं।

यह घटनाक्रम उस पृष्ठभूमि में सामने आया है जब ट्रंप पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्होंने कई संघर्षों को रोकने में भूमिका निभाई और उन्हें नोबेल मिलना चाहिए था। मचाडो ने भी यह संकेत दिया था कि वे इस सम्मान को ट्रंप के साथ “साझा” करना चाहती हैं। हालांकि, नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान ने स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत नोबेल पुरस्कार न तो साझा किया जा सकता है, न स्थानांतरित और न ही वापस लिया जा सकता है। पुरस्कार की घोषणा के साथ ही निर्णय अंतिम और स्थायी होता है।

नोबेल समिति ने सोशल मीडिया पर नियमों की व्याख्या करते हुए कहा कि पदक का भौतिक रूप यानी मेडल किसी के पास दिया या उधार रखा जा सकता है, लेकिन इससे पुरस्कार का स्वामित्व या आधिकारिक दर्जा नहीं बदलता। उदाहरण के तौर पर, दिमित्री मुरातोव ने अपना पदक यूक्रेन युद्ध के शरणार्थियों की मदद के लिए नीलाम किया था। अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने अपना साहित्य का नोबेल क्यूबा के एक चर्च को सौंप दिया था और कई अन्य विजेताओं ने समय-समय पर अपने पदक बेचे या उधार दिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मचाडो की यह पहल प्रतीकात्मक से आगे जाकर एक राजनीतिक संदेश भी देती है।  यह उनका वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की किडनैपिंग को लेकर समर्थन के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि  नियमों की दृष्टि से स्पष्ट है कि ट्रंप आधिकारिक तौर पर नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता नहीं बने हैं। फिलहाल, यह एक प्रतीकात्मक भेंट है और नोबेल की कानूनी व संस्थागत वास्तविकता इससे नहीं बदलती।

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