पिछले महीने नेपाल में हुए दंगों के बाद, भारत और नेपाल के होम मिनिस्ट्री के सीनियर अधिकारी 20 और 21 अगस्त को देहरादून में दोनों देशों के बीच बॉर्डर मैनेजमेंट और सिक्योरिटी से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच खुली और आसानी से पार की जा सकने वाली बॉर्डर पर सिक्योरिटी पर काफी जोर दिया गया है।
यह पता चला है कि बॉर्डर एरिया में बना एक मदरसा मौलवी इलियास मंसूरी, जो बांग्लादेश और पाकिस्तान की जमात का कोऑर्डिनेटर भी है, भारत की सीमा से लगे नेपाल के सुनसरी जिले के दीवानगंज में हुए दंगों में शामिल था। दंगों की साज़िश सिर्फ नेपाल तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसे भारत के बॉर्डर एरिया और खासकर बिहार तक फैलाने का प्लान था।
नेपाली मिनिस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि बॉर्डर पार से होने वाली क्रिमिनल एक्टिविटी, तीसरे देश के नागरिकों का आना-जाना, स्मगलिंग, भारत से नेपाल में ड्रग्स की स्मगलिंग, हथियारों और गोला-बारूद के गैर-कानूनी व्यापार पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा नकली करेंसी, सिक्योरिटी एजेंसियों के बीच जानकारी का लेन-देन, बॉर्डर पर कब्ज़े हटाने पर भी चर्चा होगी।
नेपाली सिक्योरिटी एजेंसियों को भारत की मदद, जानकारी का लेन-देन, नेपाल की सिक्योरिटी एजेंसियों की कैपेसिटी बिल्डिंग और नेपाल की भारत से नेशनल आइडेंटिटी कार्ड को एक वैलिड ट्रैवल डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्यता देने की रिक्वेस्ट भी चर्चा में शामिल है।
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