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Wednesday, April 8, 2026
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अमेरिका-ईरान दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमत

होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोला जाएगा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार(8 अप्रैल) को ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के कगार से पीछे हटते हुए बड़ा कदम उठाया। तेहरान द्वारा खुद निर्धारित समयसीमा समाप्त होने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने विनाशकारी हमलों की धमकियां वापस ले लीं। ट्रम्प ने दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमति जताई, जिससे पिछले 40 दिनों से जारी संघर्ष को शांत करने के लिए एक कूटनीतिक अवसर बना है। तेहरान ने भी इस युद्धविराम को स्वीकार कर लिया और शर्तों के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर सहमति दी है, जिससे राहत की भावना व्यक्त की जा रही है।

ट्रम्प ने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत ‘व्यवहारिक’ 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के बाद अमेरिका ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद करेगा। मध्य-पूर्व में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के उद्देश्य से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अगली वार्ता शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होगी।

हालांकि कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। ईरान ने युद्धविराम योजना को स्वीकार कर लिया है, फिर भी खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल हमलों की आशंका बनी हुई है। इजरायल ने भी दो हफ्तों के युद्धविराम का समर्थन किया है, लेकिन स्पष्ट किया है कि इसमें लेबनान शामिल नहीं है, जहां इस्रायल की बमबारी अभी भी जारी है।

ट्रम्प ने कहा, “आज रात ईरान पर भेजी जाने वाली विनाशकारी शक्ति को मैं रोक रहा हूं, और यदि ईरान का इस्लामिक गणराज्य होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है, तो मैं दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी और हमले स्थगित करने के लिए तैयार हूं।”

ईरान ने कहा है कि यदि उस पर हमले रोके जाते हैं, तो उसकी सशस्त्र सेनाएं भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाइयों को रोक देंगी। साथ ही उसने बताया कि वॉशिंग्टन द्वारा ईरान की 10-सूत्रीय योजना को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार करने के साथ-साथ अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित वार्ता के अनुरोध पर भी विचार किया जा रहा है।

तेहरान ने कहा कि अपनी सशस्त्र सेनाओं के साथ समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए दो हफ्तों के भीतर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन संभव बनाया जाएगा। ईरान ने इसे अपनी जीत बताया और उसकी सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि दुश्मनी समाप्त करने के लिए ट्रम्प ने ईरान की शर्तें स्वीकार की हैं।

हालांकि व्हाइट हाउस ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वास्तविकता यह है कि राष्ट्रपति ट्रम्प और अमेरिकी सेना के दबाव के कारण ही ईरान को होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

ईरान की दीर्घकालिक शांति योजना में ओमान के समन्वय से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने का प्रस्ताव शामिल है। तेहरान का कहना है कि इस राजस्व का उपयोग पुनर्निर्माण में किया जाएगा। इसके अलावा, ईरान की शर्तों में क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना और जमी हुई संपत्तियों की वापसी भी शामिल है।

एक अधिकारी के हवाले से असोसिएटेड प्रेस  ने बताया कि बीजिंग इस समझौते में अपनी भूमिका निभाने के लिए मुख्य रूप से पाकिस्तान, तुर्की और इजिप्त जैसे मध्यस्थों के साथ काम कर रहा था। वार्ता में शामिल अधिकारियों के अनुसार, मध्यस्थता प्रयासों में पाकिस्तान अग्रणी रहा, जबकि पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच दूरी कम करने में मिस्र ने अहम भूमिका निभाई। गाजा और ईरान दोनों जगह हुए युद्धविराम में मिस्र की भूमिका महत्वपूर्ण रही, वहीं तुर्की ने भी इन प्रयासों में सहयोग किया।

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