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Friday, January 23, 2026
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रूसी तेल पर अमेरिका की दोहरी नीति का पर्दाफाश!

“जिसने प्रोत्साहित किया, वही अब धमका रहा है”

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रूसी तेल के मुद्दे पर भारत को धमकाने वाले अमेरिका की पोल अब उसी के पूर्व राजनयिक खोल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी के बीच, पूर्व अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी का एक पुराना वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वे स्वीकार करते हैं कि रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को अमेरिका ने स्वयं प्रोत्साहित किया था — ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।

इस वीडियो में गार्सेटी कहते हैं, “उन्होंने (भारत ने) रूसी तेल इसलिए खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई रूस से तेल खरीदे, लेकिन एक तय मूल्य सीमा पर। यह किसी नीति का उल्लंघन नहीं था, बल्कि उसी नीति का हिस्सा था। हम नहीं चाहते थे कि तेल की कीमतें बढ़ें, और भारत ने इस नीति को पूरा किया।”

वीडियो के सार्वजनिक होने से ट्रंप की वर्तमान धमकियों की असंगति और अमेरिका की दोहरी नीति उजागर हुई है। भारत ने भी सोमवार (4अगस्त) को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उसका ऊर्जा नीति निर्णय अनुचित और अन्यायपूर्ण आलोचना के बावजूद राष्ट्रीय हित और बाज़ार की ज़रूरतों पर आधारित रहेगा।

2022 में अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलन ने भी कहा था कि भारत रूसी तेल खरीद सकता है, भले ही कीमत तय सीमा से ऊपर हो, जब तक वह पश्चिमी सेवाओं का उपयोग न करे। येलन ने रॉयटर्स से कहा था, “भारत और उसकी निजी कंपनियां किसी भी कीमत पर तेल खरीद सकती हैं, जब तक वे वैकल्पिक सेवाओं का उपयोग करें। दोनों ही तरीके मान्य हैं।”

फरवरी 2024 में अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री जेफ्री पायट ने भी माना था, “भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद के ज़रिए वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”

इसके बावजूद, ट्रंप ने भारत पर आरोप लगाए कि वह रूस के युद्ध को आर्थिक मदद दे रहा है और सस्ते तेल को फिर बेचकर लाभ कमा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “वे इस बात की परवाह नहीं करते कि रूस की युद्ध मशीन यूक्रेन में कितनों को मार रही है। इसलिए मैं भारत पर भारी टैरिफ लगाऊंगा।”

सरकार ने अमेरिकी रुख को खारिज करते हुए कहा विशेष रूप से रूस से कि ऊर्जा आयात भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की दृष्टि से आवश्यक है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया, “भारत का यह व्यापार बाज़ार-प्रेरित और राष्ट्रीय हित से संचालित है। आलोचना करने वाले देश स्वयं भी रूस से व्यापार कर रहे हैं — जबकि उनके लिए यह कोई अपरिहार्य आवश्यकता नहीं है।”

इसके साथ ही भारत ने यह भी याद दिलाया कि “अमेरिका ने स्वयं भारत को प्रोत्साहित किया था कि वह रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार स्थिर रह सके।”

ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत से आयातित वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगा दिया है और 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। अमेरिका-भारत के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं फिलहाल ठहर गई हैं। हालांकि भारत ने वार्ता जारी रखने की इच्छा जताई है, लेकिन स्पष्ट किया है कि कृषि और डेयरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वह कोई समझौता नहीं करेगा।

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