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अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता: टैरिफ 10-15% तक घटाने की कोशिश!

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भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता वैश्विक आर्थिक हालात और अमेरिका की मंदी की आशंकाओं के बीच खास महत्व रखती है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका भारत पर लगाए गए मौजूदा 50% टैरिफ को घटाकर 10-15% तक लाने पर विचार कर रहा है।

भारत इस समय दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। IMF के अनुसार, भारत की विकास दर 2025 में 6.2% और 2026 में 6.3% रहने का अनुमान है, जबकि वैश्विक दर क्रमशः 3% और 3.1% रहेगी। वहीं, अमेरिका की विकास दर 2024 के 2.8% से घटकर 2025 में 1.6% तक आने की आशंका है। मंदी की इस चिंता ने अमेरिका को भारत के साथ अधिक लचीला रुख अपनाने पर मजबूर किया है।

भारत तेजी से विकसित होते हुए चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा है। टेस्ला, एप्पल और सेमीकंडक्टर कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं। एप्पल ने अकेले वित्त वर्ष 2025 में 22 अरब डॉलर से अधिक के आईफोन भारत में असेंबल किए, जो पिछले साल से 60% ज्यादा है। हाल ही में लॉन्च हुई आईफोन 17 सीरीज की बिक्री को लेकर भारतीय उपभोक्ताओं का उत्साह बाजार में लंबी कतारों के रूप में दिखा।

खुदरा बाजार की बढ़ती ताकत

भारत का रिटेल सेक्टर भी अमेरिका को आकर्षित कर रहा है। डेलॉइट-फिक्की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिटेल मार्केट 2030 तक बढ़कर 1.93 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2024 में 1.06 ट्रिलियन डॉलर था। ब्रिक्स देशों की नई करेंसी योजना डॉलर की पकड़ कमजोर कर सकती है। ऐसे में अमेरिका-भारत के बीच व्यापार समझौते पर तेजी से बातचीत दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, नई दिल्ली में हुई वार्ता में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार की अहमियत स्वीकार करते हुए पारस्परिक लाभकारी समझौते पर जल्द नतीजे तक पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि डील का पहला चरण नवंबर तक फाइनल हो सकता है।

भारत की तेज़ी से बढ़ती आर्थिक ताकत और अमेरिका की मंदी की आहट ने दोनों देशों को नए व्यापार समीकरण की ओर धकेला है। यह डील  भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी बड़ा असर डालेगी।

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