ईरान पर अमेरिका की नई प्रतिबंध: कंपनियों पर बॉलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम में सहयोग का आरोप

ईरान पर अमेरिका की नई प्रतिबंध: कंपनियों पर बॉलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम में सहयोग का आरोप

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अमेरिका ने ईरान के बॉलिस्टिक मिसाइल और मानव रहित हवाई यान (UAV) कार्यक्रम से जुड़े 32 व्यक्तियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने कहा है कि ये सभी संस्थाएं और व्यक्ति ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्किये, चीन, हांगकांग, भारत, जर्मनी और यूक्रेन में स्थित हैं और ईरान के हथियार उत्पादन तंत्र को सहायता देने वाले जटिल आपूर्ति नेटवर्क का हिस्सा हैं।

OFAC की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया है कि यह कार्रवाई ईरान के उन नेटवर्क्स को निशाना बनाती है जो “सामग्री, तकनीक और वित्तीय साधनों के माध्यम से ईरान के मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम को समर्थन दे रहे हैं।”

अमेरिका के आरोपों पर ईरान ने बार-बार यह दोहराया है कि उसके मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम पूरी तरह से रक्षात्मक उद्देश्य के लिए हैं और उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। तेहरान ने कहा है कि वह किसी भी आक्रामक गतिविधि में शामिल नहीं है, बल्कि अपने क्षेत्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने पहले भी कहा था, “अमेरिका बार-बार निराधार आरोप लगाकर हमारे तकनीकी और औद्योगिक विकास को रोकने की कोशिश कर रहा है। हमारा मिसाइल कार्यक्रम किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करता।”

हाल के महीनों में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर चल रहा है, लेकिन उसके बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने अपने मिसाइल और UAV कार्यक्रमों का उपयोग मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने के लिए किया है, जबकि ईरान इस आरोप को सिरे से खारिज करता है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने यह प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए हैं जब ईरान के साथ अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ताएं गतिरोध में हैं। दूसरी ओर, तेहरान का कहना है कि अमेरिका और कब्जा करने वाला जिओनिस्ट शासन (इज़राइल) बार-बार ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाइयां कर रहे हैं, जो सभी अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन है।

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