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ईरान तनाव के बीच वेस्ट एशिया की ओर बढ़ा अमेरिकी युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन,

बड़ी कार्रवाई के संकेत

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पेंटागन ने अपनी सैन्य तैनाती में अहम बदलाव किया है। अमेरिकी नौसेना का विशाल युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन दक्षिण चीन सागर से वेस्ट एशिया की ओर रवाना हो गया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित सैन्य कदम को लेकर असमंजस बना हुआ है।

पेंटागन के आदेश के तहत USS अब्राहम लिंकन और उसका पूरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप Arleigh Burke-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और कम से कम एक अटैक सबमरीन सहित अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। CENTCOM का कार्यक्षेत्र चार मिलियन वर्ग मील से अधिक में फैला है, जिसमें वेस्ट एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और उत्तर-पूर्वी अफ्रीका के 21 देश शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस स्ट्राइक ग्रुप को वेस्ट एशिया पहुंचने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा।

अमेरिकी नौसेना संस्थान के कैरियर ट्रैकर के मुताबिक, हाल के दिनों में वेस्ट एशिया में कोई भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात नहीं था और USS अब्राहम लिंकन इस क्षेत्र के सबसे नजदीक, दक्षिण चीन सागर में सक्रिय था। पिछले महीने से यह जहाज वहां तैनात था और हाल ही में इसने लाइव-फायर ड्रिल, फ्लाइट अभ्यास, समुद्र में ईंधन भरने, डैमेज कंट्रोल और विस्फोटक निपटान जैसे सैन्य अभ्यास पूरे किए है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को इंडो-पैसिफिक से हटाकर वेस्ट एशिया भेजना केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं होती। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम संभावित रूप से लंबे सैन्य ऑपरेशन या क्षेत्र में निरंतर मौजूदगी की तैयारी का संकेत है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस तैनाती का अंतिम उद्देश्य क्या है।

इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों में भी विरोधाभास देखने को मिला है। एक ओर उन्होंने ईरान में प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि मदद रास्ते में है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुकी हैं तो अमेरिका स्थिति पर नजर रखेगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई फिलहाल टाली जा सकती है।

साथ ही, अमेरिका ने कतर के अल-उदीद एयर बेस से कुछ कर्मियों को हटाने के निर्देश दिए हैं और ईरान ने तेहरान आने-जाने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने के लिए NOTAM जारी किया है। क्षेत्रीय देशों सऊदी अरब, कतर, तुर्किये और ओमान सहित इजरायल ने भी कथित तौर पर अमेरिका को ईरान पर हमले से बचने की सलाह दी है।

बता दें की, USS अब्राहम लिंकन परमाणु ऊर्जा से संचालित निमित्ज़-क्लास का पांचवां विमानवाहक पोत है, 100,000 टन से अधिक विस्थापन और लगभग 1,100 फीट लंबाई के साथ दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में गिना जाता है। यह 90 लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर ले जाने में सक्षम है और इससे पहले इराक, कुवैत, रेड सी और यमन से जुड़े  अभियानों में भी अहम भूमिका निभा चुका है। फिलहाल, इस तैनाती को लेकर यही सवाल बना हुआ है कि क्या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है या वेस्ट एशिया में किसी बड़े घटनाक्रम की भूमिका तैयार की जा रही है।

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