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Thursday, January 1, 2026
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Uttar Pradesh News,क्या अब जौनपुर जिले का भी नाम बदलकर ये होनेवाला है? जानें

जौनपुर का नाम जमदग्निपुरम करने की मांग

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जौनपुर। यूपी में अब जौनपुर का नाम बदलने की मांग उठ रही है। केराकत से बीजेपी के विधायक दिनेश चौधरी ने जौनपुर जिले का नाम बदलकर परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि के नाम पर जमदग्निपुरम करने की मांग की है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निवेदन किया है। जौनपुर जिले का नाम बदलने की मांग को लेकर राजनीति तेज हो गई है। दिनेश चौधरी ने कहा कि पूर्व में जौनपुर का नाम जमदग्निपुरम था। तेरहवीं शताब्दी में मोहम्मद बिन तुगलक ने इस शहर का नाम अपने भाई जूना खान के नाम पर बदलकर जौनपुर रख दिया। जौनपुर का नाम परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि के नाम पर जमदग्निपुरम रखा जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जौनपुर जिला का नाम बदलने की मांग की है।

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए केराकत के विधायक ने कहा कि सभी विरोधी दल ब्राह्मणों के नाम पर सियासत कर रहे हैं। ब्राह्मण शिरोमणि भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि के नाम पर सब चुप्पी साधे हुए हैं। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह जौनपुर का भी नाम बदला जाए और इसे ऋषि जमदग्नि के नाम पर वापस जमदग्निपुरम नाम दिया जाना चाहिए। दिनेश चौधरी ने सीएम योगी से अनुरोध किया कि जौनपुर का भी नाम बदलकर जमदग्निपुरम रखा जाए।

कौन थे ऋषि जमदग्नि?
जानकारी के अनुसार प्राचीण काल में जमदग्नि परम तेजस्वी ऋषि थे। वो ‘भृगुवंशी’ ऋचिक के पुत्र थे। उनकी गिनती ‘सप्तऋषियों’ में होती है। उनकी पत्नी राजा प्रसेनजीत की पुत्री रेणुका थीं। जमदग्नि ने अपनी तपस्या और साधना द्वारा उच्च स्थान प्राप्त किया था जिससे लोग उनका काफी आदर-सत्कार करते थे। जमदग्नि और रेणुका के पांच पुत्र थे। रुमणवान, सुषेण, वसु, विश्ववानस और परशुराम।

UP में नाम बदलने को लेकर सियासत गर्म

सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पलटवार किया है। अखिलेश यादव और मायावती शहरों के नाम बदलने को लेकर पहले ही नूरा-कुश्ती करते रहे हैं. जबकि बीजेपी सरकार के द्वारा नाम बदलकर इन्हें दोबारा प्राचीन और पौराणिक नाम दिया गया है। सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि चाहे इलाहाबाद हो या फैजाबाद, या फिर कोई और शहर के नाम बदलने की बात रही हो, राज्य सरकार ने इन शहरों के पौराणिक नाम दोबारा रखे हैं। उन्होंने कहा कि देश में गजनी के लोग आये, उन्होंने जो नाम बनाये, हम उसी पर चलते रहे. मगर भारत की अपनी संस्कृति और इतिहास है इसलिए हमें गजनी से संस्कृति लेने की आवश्यकता नहीं है. वो संस्कृति एसपी और बीएसपी को ही प्यारी हो.वहीं, सुल्तानपुर जिले का नाम बदलकर कुश भवनपुर किए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा प्रस्ताव आया जरुर है. लेकिन इस पर फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया जाएगा. जबकि मिर्जापुर और अलीगढ़ जिले का नाम बदलने को लेकर सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि जनता से जो मांग आयेगी, सरकार उस पर फैसला करेगी।

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