अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला पर किए गए कथित ‘बड़े पैमाने’ के सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ नाम दिया गया है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय नियमों के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।
शनिवार (3 जनवरी) को अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला पर हमला किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में कम से कम सात बड़े विस्फोट हुए। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 40 लोगों की मौत हुई। हमलों के प्रमुख लक्ष्य कराकस स्थित जनरलिसिमो फ्रांसिस्को डी मिरांडा एयर बेस (ला कार्लोटा), फुएर्ते तिउना सैन्य परिसर, पोर्ट ला गुएरा, हिगुएरोते एयरपोर्ट और मिरांडा राज्य के सेरो एल वोल्कान स्थित दूरसंचार टावर रहे।
हमलों के बाद अमेरिकी बलों ने राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। दोनों को पहले USS Evo jima ले जाया गया और फिर न्यूयॉर्क पहुंचाया गया, जहां मादुरो को मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर (एमडीसी) में रखा गया है। मादुरो पर ‘नार्को-आतंकवाद’ से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि न्याय विभाग के अनुरोध पर सेना की मदद से मादुरो की गिरफ्तारी की गई। न्यूयॉर्क की एक ग्रैंड जूरी ने मादुरो, उनकी पत्नी, बेटे, दो राजनीतिक नेताओं और एक कथित अंतरराष्ट्रीय गिरोह सरगना के खिलाफ आतंकवाद, ड्रग्स और हथियारों से जुड़े आरोपों में अभियोग लगाया है। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने सोशल मीडिया पर कहा कि आरोपी “जल्द ही अमेरिकी धरती पर अमेरिकी अदालतों में अमेरिकी न्याय की पूरी कठोरता का सामना करेंगे।”
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेनेजुएला पर अमेरिकी तेल हितों की चोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका उन्हें वापस लेगा और फिलहाल देश को चलाएगा, हालांकि इसके विवरण स्पष्ट नहीं किए गए।
अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने इन दावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेरेमी पॉल ने कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि यह एक कानून प्रवर्तन अभियान था और फिर पलटकर कहें कि अब हमें देश चलाना है। यह किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।” नोट्रे डेम लॉ स्कूल के प्रोफेसर और पूर्व अमेरिकी अभियोजक जिमी गुरुले ने इसे स्पष्ट रूप से एक खुला, अवैध और आपराधिक कृत्य बताया।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैथ्यू वैक्समैन ने रॉयटर्स से कहा, “केवल एक आपराधिक अभियोग किसी विदेशी सरकार को हटाने के लिए सैन्य बल के उपयोग का अधिकार नहीं देता, और प्रशासन संभवतः इसे आत्मरक्षा के सिद्धांत पर टिकाने की कोशिश करेगा।”
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है, जो देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता के खिलाफ सैन्य बल प्रयोग से रोकता है। डौटी स्ट्रीट चैंबर्स के संस्थापक प्रमुख और सिएरा लियोन में संयुक्त राष्ट्र युद्ध अपराध न्यायालय के पूर्व अध्यक्ष जियोफ्री रॉबर्टसन केसी ने कहा, “वास्तविकता यह है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कर रहा है। उसने आक्रामकता का अपराध किया है, जिसे नूर्नबर्ग अदालत ने सर्वोच्च अपराध बताया था।”
अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रोफेसर सुसान ब्रू ने कहा कि यह हमला केवल तभी वैध माना जा सकता था जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति होती या आत्मरक्षा की स्थिति होती। उनके अनुसार, “इन दोनों ही आधारों पर कोई सबूत मौजूद नहीं है।”
कानूनी जानकारों का यह भी कहना है कि अमेरिकी कांग्रेस ने युद्ध की घोषणा नहीं की है, जबकि संविधान के तहत यह अधिकार उसी के पास है। ड्रग तस्करी और गिरोह गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय कानून में सशस्त्र संघर्ष नहीं माना जाता, जो सैन्य कार्रवाई को उचित ठहरा सके।
हालांकि, अमेरिका ने पहले भी विदेशी धरती पर अभियुक्तों को पकड़ा है, जैसे 1989 में पनामा के जनरल मैनुएल नोरिएगा की गिरफ्तारी, लेकिन उन मामलों में परिस्थितियां और दावे अलग थे।
मादुरो की गिरफ्तारी में एक और बड़ा सवाल उनकी प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) को लेकर है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत राष्ट्राध्यक्षों को विदेशी अदालतों में आमतौर पर प्रतिरक्षा प्राप्त होती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि मादुरो वैध राष्ट्रपति नहीं हैं, बल्कि एक ड्रग तस्कर संगठन के मुखिया हैं जो सरकार का मुखौटा लगाए हुए हैं। भले ही अमेरिका ने 2019 से मादुरो को वैध राष्ट्रपति के रूप में मान्यता नहीं दी है लेकिन, वेनेजुएला की राष्ट्रीय निर्वाचन परिषद ने 2018 और 2024 के चुनावों में मादुरो को विजेता घोषित किया था
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