जब एक रोल के लिए शाहरुख खान को कटवाने पड़े थे लंबे बाल, दुखी मन से मानी थी शर्त!

शाहरुख खान ने हंसराज कॉलेज से बीए इकोनॉमिक्स किया था। इस दौरान वे दिल्ली के 'थिएटर एक्शन ग्रुप' से जुड़े और प्रसिद्ध थिएटर निर्देशक बैरी जॉन के मार्गदर्शन में अभिनय सीखा।

जब एक रोल के लिए शाहरुख खान को कटवाने पड़े थे लंबे बाल, दुखी मन से मानी थी शर्त!

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सिनेमा के इतिहास में कुछ ही ऐसे चेहरे होते हैं, जो पर्दे पर आते ही समय की धारा को मोड़ देते हैं। आज जिसे पूरी दुनिया ‘किंग खान’ बुलाती है और उनकी हेयरस्टाइल के लाखों दीवाने रहते हैं लेकिन उनके करियर की शुरुआत में एक ऐसा वक्त भी आया था, जब अभिनेता को अपने बालों को कटाना पड़ा था।

यह दौर तब का है जब शाहरुख अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद कर रहे थे। आज भले ही लंबे बाल और उनका सिग्नेचर हेयरस्टाइल उनकी पहचान बन चुका हो लेकिन संघर्ष के शुरुआती दिनों में निर्माताओं और निर्देशकों की शर्तों के आगे उन्हें अपनी पसंद से समझौता करना पड़ा था। आखिर क्या थी वो मजबूरी और किस फिल्म या प्रोजेक्ट के दौरान शाहरुख को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा था?

2 नवंबर 1965 को नई दिल्ली में एक मुस्लिम परिवार में जन्मे अभिनेता शाहरुख खान को रोमांस का किंग कहा जाता है लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि 90 के दशक में जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा था, तो किसी भी बड़े हीरो ने विलेन का रोल करने से परहेज किया था। उस दौर में शाहरुख ने बाजीगर, डर और अंजाम जैसी फिल्मों में निगेटिव रोल से दर्शकों के मन में खौफ पैदा किया और फिर हीरो बनकर दर्शकों का दिल जीत लिया।

शाहरुख खान ने हंसराज कॉलेज से बीए इकोनॉमिक्स किया था। इस दौरान वे दिल्ली के ‘थिएटर एक्शन ग्रुप’ से जुड़े और प्रसिद्ध थिएटर निर्देशक बैरी जॉन के मार्गदर्शन में अभिनय सीखा। इसके बाद उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में पीजी में दाखिला लिया था लेकिन अभिनय करने के जुनून के चलते अभिनेता ने अपना पीजी बीच में छोड़ दिया था।

बताया जाता है कि माता-पिता के देहांत के बाद बड़ा मुकाम हासिल करने की इच्छा लेकर शाहरुख साल 1991 में दिल्ली छोड़कर मुंबई आ गए थे। अभिनेता रंगमंच में सक्रिय थे, जहां पर उनके स्वाभाविक अभिनय और जबरदस्त ऊर्जा ने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

शाहरुख खान को कैमरे के सामने अभिनय करने का सबसे पहला ब्रेक जाने-माने निर्देशक लेख टंडन ने अपने धारावाहिक ‘दिल दरिया’ में दिया था। हालांकि, इस शो में काम करने के लिए निर्देशक ने अभिनेता के सामने एक अजीब-सी शर्त रख दी थी।

उन्होंने शाहरुख से अपने लंबे और बिखरे बाल कटवाने के लिए कहा था। शाहरुख को अपने बालों से बहुत प्यार था लेकिन अभिनय के जुनून के कारण उन्होंने दुखी मन से इस शर्त को स्वीकार कर लिया और अपने बाल कटवा लिए। इस शो में अभिनेता को ‘नंदू’ का छोटा सा रोल मिला था।

प्रोडक्शन और शूटिंग में देरी के कारण ‘दिल दरिया’ का प्रसारण समय पर नहीं हो पाया। शाहरुख खान को कर्नल राज कपूर का सीरियल फौजी मिल गया, जो पहले ऑन-एयर हो गया। इसी वजह से इसे आधिकारिक तौर पर शाहरुख खान का पहला ऑन-स्क्रीन डेब्यू माना जाता है।

धारावाहिक ‘फौजी’ के लिए अभिनेता जब कर्नल राज कपूर के ऑफिस ऑडिशन देने के लिए पहुंचे थे, तो निर्देशक को शाहरुख खान की काबिलियत पर भरोसा नहीं था। हालांकि, ऑडिशन की दिलचस्प बात यह है कि कर्नल कपूर को लगा था कि शाहरुख के गालों के डिंपल असली नहीं हैं बल्कि उन्होंने उसे छूकर देखा था।

शाहरुख खान को शुरुआत में इस शो में सेकेंड लीड या एक छोटे से साइड रोल (अभिमन्यु राय) के लिए चुना गया था लेकिन जब कैमरा चालू हुआ, तो कर्नल कपूर और कैमरामैन ने नोटिस किया कि अभिनेता की गजब की स्क्रीन प्रेजेंस और चुलबुले अंदाज को दर्शकों की तरफ से प्यार मिलने लगा जिस वजह से उनका रोल बढ़ा दिया गया और वह शो के मुख्य स्टार बनकर उभरे।

फौजी के सुपरहिट होने के बाद शाहरुख रातोंरात भारत के हर घर में मशहूर हो गए। इसके बाद उन्हें अजीज मिर्जा के लोकप्रिय शो ‘सर्कस’ (1989) में काम मिला। टेलीविजन पर उनकी इसी सफलता को देखकर हेमा मालिनी ने उन्हें पहचाना और अपनी फिल्म ‘दिल आशना है’ के लिए बतौर लीड हीरो साइन कर लिया जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हालांकि, शुरुआती दौर में उन्होंने लीक से हटकर ‘बाजीगर’, ‘डर’ और ‘अंजान’ जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाईं और खूब वाहवाही बटोरी। ‘बाजीगर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। 1995 में आई ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ ने भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल दिया और उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में अमर कर दिया।

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