अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो चार दिन के भारत दौरे पर थे। इस बीच उनके कुछ बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह उनके नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रसारित भारत को लेकर किए गए विवादित बयान को माना जा रहा है।
‘नरक के द्वारा’ वाली टिप्पणी को लेकर एक पत्रकार ने जब मार्को रुबियो से सवाल किया, तो उनके जवाब में दिया गया ‘अमेरिका में भी मूर्ख लोग हैं’ वाला बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर रुबियो ने किसे ‘मूर्ख’ कहा था? क्या उनका इशारा अपने ही राष्ट्रपति की ओर था? सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या उन्होंने अनजाने में अपने ही बॉस की आलोचना कर दी। विवाद बढ़ने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बयान से जुड़ी अपनी पोस्ट चुपचाप हटा दी।
24 मई को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो से अमेरिका की ओर से भारत-विरोधी और कथित नस्लवादी टिप्पणियों को समर्थन दिए जाने के बारे में पूछा गया। यह सवाल उस संदर्भ में था, जब एक अमेरिकी पॉडकास्टर द्वारा भारत को ‘नरक’ कहे जाने वाली टिप्पणी को ट्रंप का समर्थन मिला था।
इस पर रुबियो ने पूछा कि यह टिप्पणी किसने की थी। पत्रकार ने ट्रंप का नाम सीधे लेने से बचते हुए कहा कि यह टिप्पणी “काफी चर्चित” थी और उसे समर्थन भी मिला था। इसके बाद रुबियो ने जवाब दिया, “मुझे यकीन है कि ऑनलाइन और अन्य जगहों पर लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी होगी, क्योंकि दुनिया के हर देश में मूर्ख लोग होते हैं।”
बाद में पत्रकार ने स्पष्ट किया कि उसका सवाल ट्रंप की ‘हेलहोल’ (नरक) संबंधी पोस्ट के बारे में था।
पिछले महीने, ट्रंप ने एक दक्षिणपंथी पॉडकास्ट का ट्रांसक्रिप्ट साझा किया था, जिसमें होस्ट माइकल सावेज ने अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता के संवैधानिक अधिकार की आलोचना की थी। इसी दौरान भारत और चीन पर इस व्यवस्था का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए दोनों देशों को ‘नरक’ कहा गया था।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि रुबियो ने किसे ‘मूर्ख’ कहा, लेकिन आलोचकों ने तुरंत यह इंगित किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने अनजाने में ट्रंप की टिप्पणी को ‘मूर्खतापूर्ण’ करार दे दिया।
रुबियो और ट्रंप के बीच पहले भी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, इसलिए कुछ लोग इसे राष्ट्रपति पर अप्रत्यक्ष हमला मान रहे हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने भी शुरुआत में X (पूर्व में Twitter) पर रुबियो की यह टिप्पणी साझा की थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा दी गई। अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक एड क्रैसेनस्टीन ने ट्वीट कर कहा कि विदेश विभाग ने पहले इस बातचीत को सार्वजनिक किया था, लेकिन जब लोगों ने यह बताना शुरू किया कि रुबियो का जवाब अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप के बयान को मूर्खतापूर्ण बता रहा है, तो उसे बाद में हटा दिया गया।
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