1 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट सिर्फ एक दूरी की माप नहीं है, बल्कि पूरे सौर मंडल को मापने का आधार है। मंगल 1.5 एयू की दूरी पर है, जबकि बृहस्पति 5.2 एयू दूर है। खगोलविद इसी यूनिट के आधार पर प्लैनेट्स, तारों और आकाशगंगाओं की दूरी आसानी से समझ पाते हैं।
कनाडियन स्पेस एजेंसी (सीएसए) के अनुसार, 1 एयू सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी को परिभाषित करता है, जो ठीक 149.6 मिलियन किलोमीटर है। इसे आसान शब्दों में समझें तो अगर आप कार से लगातार बिना रुके यात्रा करें, तो पृथ्वी के 3,750 चक्कर लगाने के बराबर दूरी तय करनी पड़ेगी।
यह दूरी इतनी ज्यादा है कि अगर हम आज सूर्य की ओर सीधे कार से निकलें तो हमें पहुंचने में लगभग 177 साल लग जाएंगे। इतनी दूरी पर होने के बावजूद सूर्य पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह न सिर्फ रोशनी और ऊर्जा देता है बल्कि मौसम, जल चक्र और पौधों के विकास को भी नियंत्रित करता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का पोलारिमीटर टू यूनिफाई द कोरोना एंड हेलिओस्फियर यानी पंच मिशन सूर्य और उसके प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने के लिए काम करता है।
वैज्ञानिक जानना चाहते हैं कि सौर हवा कहां से शुरू होती है और यह कैसे पूरे सौर मंडल में फैलती है। यह जानकारी भविष्य के स्पेस मिशन्स और पृथ्वी पर होने वाले सौर तूफानों की भविष्यवाणी के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
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