यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच लंबे समय से अटकी मुक्त व्यापार संधि (FTA) अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के संकेतों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बातचीत लगभग अंतिम चरण में है। इसी कड़ी में वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा भारत के गणतंत्र दिवस पर बतौर प्रमुख अतिथी रुप में पहुंचे है। इसे भारत-EU संबंधों में एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है, जहां प्रस्तावित समझौते को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है।
EU के इन शीर्ष नेताओं की टीम किसी एक सदस्य देश के बजाय पूरे 27-देशीय ब्लॉक का प्रतिनिधित्व करती है। भारतीय पक्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात होगी। पहली बार EU के शीर्ष नेताओं को सामूहिक रूप से भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य अतिथि बनाया गया है, जो द्विपक्षीय नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी के नए दौर का संकेत है।
25-27 जनवरी 2026 के बीच की यात्रा व्यापार, सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण पर केंद्रित होनी है। सबसे अहम एजेंडा भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है, जिसकी बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, 2013 में ठप पड़ी और 2022 में फिर से शुरू हुई। यदि शिखर सम्मेलन में समझौते की घोषणा होती है, तो कुछ महीनों में इसका अस्थायी क्रियान्वयन संभव है, जबकि पूर्ण अनुमोदन 12-18 महीनों में हो सकता है।
इसका समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की आक्रामक नीतियों के चलते संरक्षणवाद बढ़ चूका है और अमेरिका में संभावित टैरिफ वृद्धि से सप्लाई-चेन को प्रभावित हो रही है। भारत और EU दोनों ही चीन पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक बाजार व साझेदार तलाशने की कोशिश में हैं।
नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड और शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत की बढ़ती भू-राजनीतिक भूमिका को रेखांकित करता है। प्रस्तावित FTA के तहत 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म किए जाने की योजना है, भारत 90% और EU 95% की बात कर रहा है, जो 5-10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। कृषि, डेयरी, ऑटो, वाइन और स्पिरिट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोटा और धीरे-धीरे कटौती का प्रावधान होगा।
वर्तमान में EU में भारतीय निर्यात पर औसत टैरिफ 3.8% है, जबकि भारत में EU उत्पादों पर यह 9.3% है। FTA के बाद अधिकांश शुल्क शून्य हो जाएंगे, जिससे भारतीय वस्त्र, फार्मा, स्टील और पेट्रोलियम उत्पादों को बड़ा लाभ मिलेगा।
यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों को सेवा देगा, जिससे आने वाले दशक में वस्तुओं व सेवाओं का कुल व्यापार 200-250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत के लिए यह विदेशी निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार सृजन का बड़ा अवसर है, अनुमान है कि 1 करोड़ से अधिक नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। EU को भारत के 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले बाजार तक गहरी पहुंच मिलेगी और उसकी सेवाओं का निर्यात दोगुना हो सकता है।
अमेरिका-चीन तनाव और वैश्विक व्यापार पुनर्संतुलन के दौर में यह FTA न केवल भारत-EU संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई-चेन को भी नए सिरे से आकार दे सकता है। इसी वजह से EU नेताओं की भारत यात्रा को एक साधारण कूटनीतिक दौरा नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के भविष्य से जुड़ा निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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