कुर्सी योग बुजुर्गों और उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिन्हें जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी या संतुलन की समस्या है। इसमें योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कुर्सी पर बैठकर या उसका सहारा लेकर किया जाता है। इसके लिए सिर्फ एक मजबूत और स्थिर कुर्सी की जरूरत पड़ती है। इसे घर पर, पार्क में या किसी भी सुरक्षित जगह पर आसानी से किया जा सकता है।
कुर्सी योग न सिर्फ बुजुर्गों के लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक सुरक्षित और सुलभ विकल्प है जो योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं लेकिन पारंपरिक तरीके से करने में परेशानी महसूस करते हैं।
इस योग में कंधे और गर्दन की स्ट्रेचिंग, कुर्सी पर बैठकर पैरों की विभिन्न गतिविधियां और सहारे के साथ खड़े होकर किए जाने वाले आसन शामिल हैं। ये आसान तरीके पारंपरिक योग को जोखिम मुक्त बनाते हैं। नियमित अभ्यास से जोड़ों की जकड़न कम होती है, मांसपेशियां मजबूत बनती हैं और शरीर में लचीलापन बढ़ता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, कुर्सी योग की शुरुआत सरल आसनों से करनी चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में इसे शुरू करना बेहतर होता है। सप्ताह में दो-तीन बार 20 से 30 मिनट का अभ्यास भी काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
कुर्सी योग करते समय सावधानियां बरतनी भी जरूरी हैं। इसके लिए बिना पहियों वाली मजबूत कुर्सी चुनें। कुर्सी की सीट ज्यादा गद्देदार न हो, कुर्सी की पीठ सीधी होनी और ऊंचाई ऐसी हो कि पैर जमीन पर पूरी तरह सपाट रखे जा सकें।
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