दरअसल कोलेस्ट्रॉल एक फैट युक्त पदार्थ होता है, जो शरीर में कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है। लेकिन जब लो-डेन्सिटी लिपोप्रोटीन (LDL), जिसे आमतौर पर “बुरा” कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है इसकी मात्रा अधिक हो जाती है, तो यह धमनियों में प्लेक जमा कर सकता है और हृदय रोग या स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। वहीं, हाई-डेन्सिटी लिपोप्रोटीन (HDL) को अच्छा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, जो LDL को रक्त प्रवाह से निकालने में मदद करता है।
हालांकि इस परेशानी में स्टैटिन जैसी दवाएं दी जाती हैं, लेकीन जीवनशैली में बदलाव से कोलेस्ट्रॉल स्तर में महत्वपूर्ण सुधार किया जा सकता है। शोध बताते है कि ये बदलाव LDL को 5-10% या उससे अधिक कम कर सकते हैं, जबकि व्यायाम HDL बढ़ाने और LDL व ट्राइग्लिसराइड्स घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) हृदय स्वास्थ्य और कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन के लिए प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि या 75 मिनट तीव्र गतिविधि करने की सलाह देती है।
एरोबिक व्यायाम शरीर की वसा को ऊर्जा में बदलने की क्षमता बढ़ाता है, और रेज़िस्टेंस ट्रेनिंग HDL को बढ़ाने में मदद करती है। दोनों का संयोजन सबसे प्रभावी होता है। उच्च तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि LDL और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में अधिक असरदार है, जबकि रेज़िस्टेंस प्रशिक्षण HDL बढ़ाता है।
चलने के फायदे:
चलना कोलेस्ट्रॉल कम करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है। ऐसी गति में चलना जिसमें आप बात कर सकें लेकिन गा न सकें, इससे लिपिड स्तर पर सकारात्मक असर डाल सकता है। शोध में पाया गया है कि नियमित चलने से LDL कोलेस्ट्रॉल और कुल कोलेस्ट्रॉल/HDL अनुपात कम होता है, भले ही वजन में बदलाव न हो। एक अध्ययन के अनुसार चलने के कार्यक्रम से औसतन LDL 7.4 mg/dL तक कम हुआ।
वैज्ञानिक रूप से, चलने से एंज़ाइम गतिविधि बढ़ती है, जो कोलेस्ट्रॉल को ऊतकों से लीवर तक पहुंचाती है, HDL बढ़ाती है और LDL ऑक्सीडेशन को कम करती है। हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया के जोखिम को कम करने में चलना दौड़ने के बराबर असर रखता है। विशेषज्ञ सलाह देते है की रोजाना 45 मिनट, सप्ताह में पांच दिन चलने से यह बदलाव दिखाई देते है।
चलने के अलावा, आसान बॉडीवेट एक्सरसाइज मांसपेशियों को मजबूत करती हैं, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती हैं और कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन में मदद करती हैं।
उदाहरण:
- स्क्वाट्स: पैरों और कोर को मजबूत करें; 3 सेट × 10-15 रेप।
- पुश-अप्स (या वॉल/नी वेरिएंट): छाती और हाथों को लक्षित करें।
- प्लैंक्स: कोर को सक्रिय करने के लिए 20-60 सेकंड होल्ड करें।
- लंजेस: संतुलन और लोअर-बॉडी ताकत के लिए पैरों को वैकल्पिक करें।
शोध से पता चलता है कि HDL बढ़ाने के लिए रेज़िस्टेंस एक्सरसाइज कारगर है, चाहे बॉडीवेट हो या बैंड्स के साथ। इससे ट्राइग्लिसराइड्स भी कम होती है। इसे 2-3 बार प्रति सप्ताह एरोबिक गतिविधि के साथ मिलाकर करना चाहिए।
कुछ अन्य सलाहों में शरीर में फैट कम करें, ट्रांस फैट खाना छोड़ें और ओट्स, बीन्स और फलों से घुलनशील फाइबर लेंने की सलाह दी जाती है। स्वस्थ वजन बनाए रखना अतिरिक्त फैट, सूजन और LDL उत्पादन को कम करता है। साथ ही धूम्रपान, मद्यपान अर्थात स्मोकिंग और ड्रिंकिंग छोड़ने से HDL बढ़ाता है और धमनियों को नुकसान से बचाता है।
जीवनशैली में बदलाव कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन का शक्तिशाली, दवा-रहित तरीका है। नियमित चलना और सरल व्यायाम, वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ, लिपिड प्रोफाइल सुधार सकते हैं, हृदय रोग का जोखिम कम कर सकते हैं और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। छोटे कदम से शुरुआत करें, नियमित रहें, और व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।
यह भी पढ़ें:
अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई जांच शुरू, ‘अनजान वीआईपी’ पर केस दर्ज!
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: किसानों के हित के साथ कोई समझौता नहीं हुआ
बिहार: वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव ने पेश किया 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट!
