खूबसूरती ही नहीं, सेहत का भी है यह रामबाण इलाज: मधुमालती

पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और भोजन के बेहतर अवशोषण में मदद करता है।

खूबसूरती ही नहीं, सेहत का भी है यह रामबाण इलाज: मधुमालती

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आमतौर पर घरों की दीवारों और बगीचों की शोभा बढ़ाने वाली मधुमालती (Rangoon Creeper) सिर्फ एक सुंदर लता नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे एक औषधीय खजाना माना जाता है। गुलाबी, सफेद और लाल रंगों में खिलने वाला यह फूल न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि इसके औषधीय गुणों के चलते यह त्वचा रोग, सर्दी-जुकाम, पाचन समस्याएं, बुखार और यहां तक कि डायबिटीज जैसी बीमारियों से राहत दिलाने में भी उपयोगी है।

मधुमालती का बॉटेनिकल नाम ‘कॉम्ब्रेटम इंडिकम’ (Combretum indicum) है और यह ‘कैप्रीफोलिआसी’ परिवार से संबंधित है। इसकी लगभग 180 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 20 भारत में उपलब्ध हैं। भारत के अलावा यह फिलीपींस, मलेशिया, चीन, यूरोप और अमेरिका में भी पाई जाती है। रात के समय मधुमालती के फूल सफेद होते हैं, लेकिन जैसे ही सुबह सूरज की किरणें पड़ती हैं, वे गुलाबी और फिर गहरे लाल रंग में बदल जाते हैं। इसकी यह खासियत इसे नेचुरल PH इंडिकेटर की तरह भी दर्शाती है।

हालांकि मधुमालती के कई औषधीय फायदे हैं, फिर भी किसी भी रूप में इसे नियमित उपयोग में लेने से पहले आयुर्वेद विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह जरूर लें। विशेष रूप से यदि आप किसी पुरानी बीमारी या दवा के सेवन में हैं, तो स्वयं औषधि लेना नुकसानदेह हो सकता है।

मधुमालती न केवल आपके बगीचे को रंगों से भर देती है, बल्कि एक प्राकृतिक औषधालय के रूप में भी आपकी सेहत की रक्षा कर सकती है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के संगम से यह सिद्ध होता है कि प्राकृतिक चिकित्सा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां।

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