लगभग 17 वर्षों से लापता एक वसई निवासी आखिरकार अपने परिवार से फिर मिल सका, हालाँकि सड़क हादसे के बाद सांगली जिले के मिरज स्थित एक अस्पताल में वह भर्ती पाया गया। अज्ञात मरीज के रूप में भर्ती इस व्यक्ति की पहचान अस्पताल के सामाजिक सेवा विभाग की सतर्कता से हुई, जिसके बाद भावुक क्षणों के बीच परिवार का लंबे समय से प्रतीक्षित पुनर्मिलन संभव हो पाया।
व्यक्ति की पहचान संतोष दामोदर पाटिल के रूप में हुई है, जो पालघर जिले के वसई का रहने वाला था और एक छोटी सी पान की दुकान चलाया करता था। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में अपने बड़े भाई की अचानक मृत्यु से वह गहरे मानसिक तनाव में चला गया। इसी अवस्था में वह बिना किसी को बताए घर से निकल गया और फिर परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया। शुरुआती वर्षों में परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ परिवार ने यह मानना शुरू कर दिया था कि शायद संतोष अब जीवित नहीं है।
बताया जाता है कि लापता होने के बाद संतोष वर्षों तक अलग-अलग स्थानों पर भटकता रहा और हाल के कुछ समय से सांगली–मिरज क्षेत्र में रह रहा था। 13 जनवरी को मिरज में एक सड़क दुर्घटना में वह घायल हो गया, जिसके बाद उसे सरकारी अस्पताल में अज्ञात व्यक्ति के रूप में भर्ती कराया गया। बाद में उसे इलाज के लिए एक देखभाल केंद्र में स्थानांतरित किया गया।
इलाज के दौरान अस्पताल के एक सामाजिक सेवा अधिकारी ने उससे बातचीत की और धीरे-धीरे उससे कुछ बुनियादी जानकारी हासिल की। संतोष ने अपना नाम बताया और कहा कि वह वसई का रहने वाला है। इस जानकारी के आधार पर अधिकारी ने वसई क्षेत्र में अपने संपर्कों को सूचित किया।
यह सूचना अंततः स्थानीय नगरसेवक गणेश पाटिल तक पहुंची, जो संतोष के रिश्तेदार निकले। वीडियो कॉल के जरिए पहचान की पुष्टि होने के बाद परिवार से संपर्क किया गया। इसके बाद संतोष की पत्नी मंदा और पुत्र हर्षद मिरज पहुंचे और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें वापस घर ले आए।
करीब दो दशकों बाद हुए इस पुनर्मिलन को परिवार ने बेहद भावुक और अविस्मरणीय क्षण बताया है। साथ ही, अस्पताल के सामाजिक सेवा विभाग की भूमिका की सराहना की जा रही है, जिसकी पहल से वर्षों की अनिश्चितता और पीड़ा के बाद यह मानवीय कहानी सुखद अंत तक पहुंच सकी।
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