बिना शरीर को जाने कर रहे हैं त्रिफला का सेवन, वात प्रवृत्ति वाले जान लें नुकसान

बिना शरीर को जाने कर रहे हैं त्रिफला का सेवन, वात प्रवृत्ति वाले जान लें नुकसान

You are consuming Triphala without knowing your body, those with Vata tendency should know the disadvantages.

आयुर्वेद में ‘त्रिफला’ को शरीर के लिए अमृत माना गया है। पेट से जुड़ी परेशानियों से लेकर आंखों तक के लिए त्रिफला का सेवन करने की सलाह दी जाती है, और बाजार में इसका चूर्ण आसानी से मिल जाता है। त्रिफला में आंवला, बहेड़ा, और हरड़ का मिश्रण होता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, लेकिन आज के समय में खराब जीवनशैली की वजह से हर कोई बिना जाने और समझे त्रिफला का सेवन कर रहा है।

आयुर्वेद के मुताबिक त्रिदोष के कारण हर शरीर अलग होता है। अगर शरीर में वात की अधिकता है, तब त्रिफला का सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। त्रिफला के सेवन से पहले अपने शरीर की प्रवृत्ति को पहचानना और सेवन की सही विधि जानना बहुत जरूरी है। पहले जानते हैं कि वात प्रकृति और ‘त्रिफला’ का प्रभाव कैसा होता है। वात प्रकृति वालों का शरीर में रूखापन और शीत दोनों ही अधिक पाई जाती है। ऐसे लोगों के त्वचा ड्राई, पाचन कमजोर और जोड़ों में दर्द की समस्या अक्सर बनी रहती है।

वहीं त्रिफला का स्वभाव भी रुखापन पैदा करने वाला होता है। अगर इसे साधे पानी के साथ लिया जाए तो यह शरीर में रुखापन बड़ा सकता है और इससे पाचन भी कमजोर होगा। ऐसे में वात प्रवृत्ति के लोगों को त्रिफला अपने शरीर के गुणों के अनुसार लेनी चाहिए। आयुर्वेद में माना गया है कि वात प्रवृत्ति के लोगों को त्रिफला को घी और गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए।

घी से रुखापन कम होगा और आंतों में कब्ज की समस्या भी नहीं रहेगी। वहीं गुनगुना पानी मल को बाहर निकालने में मददगार साबित होगा। इसके अलावा, त्रिफला का सेवन अरंडी के तेल के साथ भी किया जा सकता है। इसके लिए गुनगुने पानी में अरंडी और त्रिफला को मिलाकर लें। इससे आंतों में गतिशीलता बढ़ेगी और वात का शमन होगा। त्रिफला चूर्ण की बजाय ‘त्रिफला घृत’ का सेवन भी वात प्रवृत्ति वालों के लिए लाभकारी रहेगा क्योंकि इसमें पहले से ही घी और अन्य औषधियां मिली हैं।

अब जानते हैं कि कब त्रिफला का सेवन करना लाभकारी होता है।आयुर्वेद में माना गया है कि वात दोष शाम और रात के समय अधिक सक्रिय होता है, इसलिए त्रिफला का सेवन रात को सोते समय करना सबसे प्रभावी रहता है।

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