चक्रासन, जिसे ‘व्हील पोज’ या ‘उर्ध्व धनुरासन’ भी कहा जाता है, शरीर को पहिए के आकार में पीछे की ओर मोड़कर किया जाने वाला योगासन है। यह न केवल रीढ़ और कमर को लचीला बनाता है, बल्कि आंखों की रोशनी बढ़ाने, कब्ज से राहत देने और मानसिक तनाव को कम करने में भी मददगार है। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करता है, मुद्रा में सुधार लाता है और शारीरिक सक्रियता को बढ़ाता है।
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोड़कर पैरों को कूल्हों के पास रखें। हाथों को सिर के पास ले जाकर हथेलियों को ज़मीन पर टिकाएं, उंगलियां कंधों की ओर होनी चाहिए। इसके बाद गहरी सांस लेते हुए हथेलियों और पैरों के बल शरीर को ऊपर उठाएं और सिर को पीछे की ओर आराम से लटकने दें। इस मुद्रा में 10–20 सेकंड तक रहें और फिर धीरे-धीरे वापस आएं।
चक्रासन नियमित रूप से करने से रीढ़ की लचक और ताकत में वृद्धि होती है, पीठ दर्द में राहत मिलती है और आंखों की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं। यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है और मानसिक स्थिरता के लिए भी लाभकारी है। हालांकि, इसे करते समय कुछ सावधानियां ज़रूरी हैं। चक्रासन खाली पेट करना चाहिए और इसे गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या पुराने दर्द से पीड़ित लोगों को नहीं करना चाहिए। बेहतर परिणामों के लिए इस योगासन का अभ्यास प्रशिक्षक की देखरेख में करना उपयुक्त रहेगा।
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