छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने शनिवार (2 अगस्त)को केरल की दो कैथोलिक ननों को जमानत दे दी। ननों को पिछले हफ्ते मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया और पासपोर्ट जमा कराने की शर्त भी रखी।
जिन ननों को जमानत मिली है, वे प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस हैं, जो केरल के अलप्पुझा जिले में सिरो-मालाबार चर्च के तहत आने वाले असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट से जुड़ी हैं। इससे पहले एक सेशन कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी कि चूंकि मामला मानव तस्करी से जुड़ा है, अतः इसकी सुनवाई का अधिकार केवल एनआईए कोर्ट को है। इसके बाद बिलासपुर की एनआईए कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर शनिवार (2 अगस्त) को फैसला सुनाया गया।
ननों की गिरफ्तारी तब हुई थी जब वे छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से तीन महिलाओं को आगरा ले जा रही थीं, जहां वे एक अस्पताल में काम करती हैं। यात्रा के दौरान दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोका और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों ननों के साथ एक आदिवासी युवक को भी गिरफ्तार किया और उन पर मानव तस्करी तथा जबरन धर्म परिवर्तन की धाराएं लगाईं।
इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। छत्तीसगढ़ के अलावा केरल और दिल्ली में कई विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सीपीएम नेता वृंदा करात सहित कुछ नेता जेल में ननों से मिलने भी पहुंचे। करात ने इस गिरफ्तारी को “असंवैधानिक और अवैध” बताया और सरकार पर धार्मिक स्वतंत्रता को कुचलने का आरोप लगाया।
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