ग्रेटर नोएडा स्थित इस्तम्बुल इंटरनेशल प्राइवेट लिमिटेड नामक प्रिंटिंग प्रेस पर उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज़्म स्क्वॉड (ATS) ने बड़ा छापा मारा है। आरोप है कि यह यूनिट ‘उत्तेजक साहित्य’ तैयार कर रही थी। जांच के हिस्से के तौर पर एटीएस टीम ने यहां से सीसीटीवी फुटेज और कई अहम दस्तावेज़ जब्त किए हैं।
दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले में तुर्की से जुड़े महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और फाइनेंशियल लिंक सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, संदिग्ध मास्टरमाइंड डॉ. उमर उन नबी वर्ष 2022 में तुर्की गया था, जहाँ उसकी मुलाकात एक विदेशी हैंडलर ‘उकासा’ से हुई। बताया जाता है कि इसी मुलाकात में भारत में एक टेरर मॉड्यूल खड़ा करने से जुड़ी विस्तृत निर्देशिका उसे सौंपी गई।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. उमर और उसके सहयोगियों का जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध बताया जा रहा है, उन्हें तुर्की में विचारधारा संबंधी मार्गदर्शन के साथ-साथ ऑपरेशनल ट्रेनिंग भी दी गई। इसके अलावा, विस्फोटक सामग्री और लॉजिस्टिक संसाधनों की खरीद के लिए आवश्यक फंडिंग भी कथित तौर पर तुर्की आधारित नेटवर्कों के माध्यम से भेजी गई। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि मॉड्यूल के कई सदस्य एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों का इस्तेमाल कर विदेशों में बैठे अपने हैंडलरों से संपर्क में थे, ताकि पारंपरिक निगरानी प्रणालियों से बचा जा सके।
यूपी एटीएस की यह रेड तुर्की कनेक्शन को समझने और संभावित आतंकी नेटवर्क का दायरा उजागर करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल जब्त की गई सामग्री की गहन जांच में जुटी हैं, ताकि मॉड्यूल के वित्तीय, तकनीकी और संगठनात्मक ढांचे के बारे में और ठोस जानकारी जुटाई जा सके।
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