भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) 300 किलोवाट श्रेणी के अत्याधुनिक हाई-एनर्जी लेजर (HEL) सिस्टम की तैनाती की दिशा में निर्णायक प्रगति कर रहा है। यह प्रणाली हाइब्रिड विद्युत-चालित गैस लेजर तकनीक पर आधारित है और निर्देशित ऊर्जा हथियारों के क्षेत्र में भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं को नया आयाम देने वाली मानी जा रही है। इस लेजर से 20 किलोमीटर से अधिक दूरी पर हवाई खतरों के खिलाफ सटीक और त्वरित कार्रवाई संभव होने की उम्मीद है।
डीआरडीओ के अनुसार, इस लेजर सिस्टम से जुड़ी अधिकांश महत्वपूर्ण तकनीकों का सफलतापूर्वक सत्यापन हो चुका है। इंजीनियरों ने इसके प्रमुख घटकों का परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया है कि वे परिचालन दबाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी विश्वसनीय प्रदर्शन करें। यह स्वदेशी रक्षा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस प्रणाली का प्रमुख घटक सेंट्रीफ्यूगल बबल सेकेंडरी ऑप्टिकल ग्रुप (SOG) है, जो हाई-प्रेशर गैस लेजर्स में प्रयुक्त एक उन्नत बीम-पाथ सुरक्षा तकनीक है। यह लेजर के एग्जिट विंडो पर संदूषण, अत्यधिक गर्मी और अशांति को रोकता है, जिससे लंबी दूरी पर बीम की गुणवत्ता बनी रहती है। यह तंत्र ऑप्टिकल वे के भीतर अपकेंद्रीय बल निर्माण कर कणों और गैस बुलबुलों को बीम से दूर बाहर की ओर निकाल देता है, जो उच्च शक्ति संचालन के दौरान अत्यंत आवश्यक है।
साथ ही इससे हाई-गेन सुपरसोनिक नोजल लेजर की दक्षता बढ़ती है। यह गेन मीडिया को सुपरसोनिक प्रवाह में प्रवाहित कर ऊर्जा निष्कर्षण को बढ़ाता है, जिससे 300 किलोवाट आउटपुट प्राप्त होता है और हानी न्यूनतम रहती हैं। सील्ड एग्जॉस्ट कंट्रोल प्रणाली का आंशिक सत्यापन हो चुका है, जो गैस के निकास को नियंत्रित करती है ताकि लेजर कैविटी के दबाव संतुलन पर असर न पड़े। इसके पूर्ण एकीकरण के लिए आगे परीक्षण किए जा रहे हैं।
एलआरटीए कार्यक्रम के तहत विकासाधीन लेजर का लार्ज एपर्चर बीम डायरेक्टर बड़े मीरर के माध्यम से उच्च-ऊर्जा बीम को निर्देशित करता है। इसका बड़ा एपर्चर 20 किमी से अधिक दूरी पर भी लक्ष्य को सटीकता से भेदता है।
डीआरडीओ के मुताबिक, इस लेजर की अपेक्षित परिचालन रेंज 20 किमी से अधिक होगी, जिससे यह ड्रोन, मिसाइल और विमानों के खिलाफ प्रभावी सिद्ध हो सकता है। परीक्षणों में उच्च-ऊंचाई और समुद्री वातावरण जैसी परिस्थितियों का अनुकरण किया गया है। हैदराबाद स्थित हाई-एनर्जी लेजर टेस्ट फैसिलिटी में बीम गुणवत्ता (M² < 1.5) और पॉइंटिंग स्थिरता (<1 माइक्रोरेडियन) जैसे मानकों की पुष्टि की गई है।
भविष्य में इस 300 किलोवाट HEL को आकाश-एनजी वायु रक्षा नेटवर्क या नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकृत किया जा सकता है। इसे 8×8 भारी वाहनों पर माउंट कर 2027 तक फील्ड ट्रायल की योजना है। डीआरडीओ का कहना है कि यह प्रणाली ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है और भारत की परतदार वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करेगी, खासकर ड्रोन स्वार्म के खिलाफ।
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