जापान के हिरोशिमा में भारतीय प्रवासी समुदाय और हिरोशिमा-नागासाकी परमाणु हमले के जीवित बचे लोगों ने मिलकर वैश्विक शांति का संदेश दिया। सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत हिरोशिमा पीस मेमोरियल में परमाणु हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर भारतीय अल्पसंख्यक महासंघ के संयोजक सांसद सतनाम सिंह संधू और प्रोफेसर हिमानी सूद के नेतृत्व में भारतीय प्रवासी समुदाय ने पुष्पांजलि अर्पित की। प्रतिभागियों ने मानव श्रृंखला बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और विश्व शांति के दृष्टिकोण की प्रशंसा की।
हिरोशिमा सर्वाइवर्स की जापानी एनजीओ पीस कल्चर विलेज के प्रमुख केंटा सुमिओका ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ही दुनिया को शांति और वैश्विक सहयोग के मार्ग पर ले जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज विश्व को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो युद्ध और हिंसा से ऊपर उठकर मानवता की एकता का मार्ग प्रशस्त कर सके।
कार्यक्रम में भारतीय प्रवासी और जापानी संगठन के सदस्यों ने ‘बेल ऑफ पीस’ (शांति घंटी) 75 बार बजाकर वैश्विक शांति का संदेश फैलाया। यह अनुष्ठान प्रधानमंत्री मोदी की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें वे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शांति की आधारशिला मानते हैं।
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम ने न केवल पीड़ितों की स्मृति को नमन किया बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दिया कि शांति, सेवा और सहयोग ही मानवता का भविष्य है।
याद रहे कि 6 अगस्त, 1945 को हिरोशिमा पर अमेरिका ने पहला परमाणु बम ‘लिटिल ब्वॉय’ गिराया था, जिसने लाखों लोगों की जान ले ली और पूरे शहर को तहस-नहस कर दिया। अनुमान के अनुसार इस हमले में लगभग 1,40,000 लोग मारे गए, और जिन लोग बचे, उन्हें रेडिएशन के दुष्प्रभावों से जूझना पड़ा। यह हमला मानव इतिहास की सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक माना जाता है।
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