हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर Su-57 के भारत में संभावित उत्पादन को लेकर फिलहाल प्रतीक्षा की स्थिति में है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, HAL रूस की एक तकनीकी टीम से मिलने वाली विस्तृत लागत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जो इस महीने आने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट भारत में Su-57 के निर्माण से जुड़ी कुल वित्तीय जरूरतों को स्पष्ट करेगी।
इस लागत आकलन में उन्नत तकनीकों की उपलब्धता, मानव संसाधन विकास, बुनियादी ढांचे के विकास और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे पहलू शामिल होंगे। रूसी प्रतिनिधिमंडल ने लगभग दो महीने पहले HAL को एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी। उस रिपोर्ट में यह अहम बात सामने आई थी कि HAL के पास Su-57 उत्पादन के लिए आवश्यक ढांचे का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा पहले से मौजूद है, जो Su-30MKI लड़ाकू विमान के उत्पादन अनुभव पर आधारित है।
HAL और सुखोई के बीच यह तालमेल नया नहीं है। दिसंबर 2000 में हुए अंतर-सरकारी समझौते के तहत Su-30MKI का लाइसेंस प्राप्त उत्पादन शुरू हुआ था। इसके तहत HAL का नासिक डिवीजन फाइनल असेंबली, कोरापुट डिवीजन AL-31FP टर्बोफैन इंजन और केरल के कासरगोड स्थित स्ट्रैटेजिक इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री एवियोनिक्स का निर्माण करता रहा है। यही अनुभव HAL को संभावित Su-57E, यानी निर्यात संस्करण, के लिए अनुकूल स्थिति में रखता है।
हालांकि, नई दिल्ली ने अभी तक स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के आने तक किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर को अंतरिम समाधान के रूप में खरीदने का निर्णय नहीं लिया है। चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने हाल ही में भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन की कमी को लेकर आठ से दस साल के अंतर की बात कही थी।
पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमान स्टेल्थ, सुपरक्रूज, अत्याधुनिक सेंसर और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताओं के कारण चौथी पीढ़ी के विमानों से कहीं आगे माने जाते हैं। यदि सरकार अंतरिम विदेशी विकल्प चुनती है, तो Su-57E के साथ अमेरिकी F-35 लाइटनिंग-II भी प्रमुख दावेदार हैं। दोनों विमानों को एयरो इंडिया 2025 में बेंगलुरु में प्रदर्शित किया गया था।
Su-57E की एक खासियत यह बताई जा रही है कि इसमें पूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन की संभावना है, जो भारत की रक्षा उत्पादन नीति के अनुरूप मानी जाती है। अक्टूबर 2025 में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने संकेत दिया था कि मॉस्को, Su-57 के सह-उत्पादन के जरिए भारत के AMCA कार्यक्रम को मदत देने के लिए तैयार है।
हालांकि आलोचक Su-57 की परिपक्वता, सीमित युद्ध अनुभव और इंजन विकास में देरी की ओर भी इशारा करते हैं। लागत रिपोर्ट में स्टील्थ कोटिंग, AL-51F1 इंजन, इर्बिस-ई रडार, एवियोनिक्स और मानव संसाधन प्रशिक्षण पर होने वाले भारी खर्च का आकलन किया जाएगा।
यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो यह भारत में पहले स्वदेशी रूप से निर्मित स्टेल्थ फाइटर विमानों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है और AMCA के आगमन तक वायुसेना की क्षमता अंतर को आंशिक रूप से भर सकती है। फिलहाल, सभी की निगाहें रूस की अंतिम लागत रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो भारत की पांचवीं पीढ़ी की रणनीति की दिशा तय कर सकती है।
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