भारत ने बुधवार (20 अगस्त) को ओडिशा तट से अपने अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) का सफल परीक्षण किया। परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम यह मिसाइल चीन के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम बताई जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि परीक्षण के दौरान सभी तकनीकी और परिचालन मानकों को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया गया।
भारत और चीन, दुनिया की दो सबसे अधिक जनसंख्या वाली शक्ति याँ, लंबे समय से दक्षिण एशिया में प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुए घातक सीमा संघर्ष के बाद से दोनों देशों के रिश्ते काफी बिगड़े हैं। हालांकि पिछले वर्ष रूस में हुए शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से दोनों देशों ने रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है। इस महीने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में शामिल होने के लिए मोदी के 2018 के बाद पहली बार चीन जाने की संभावना है।
भारत का पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान भी परमाणु हथियारों से लैस है। मई में भारतीय प्रशासित कश्मीर में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए थे। दौरान अग्नि-5 सहित भारत की घरेलू तकनीक से बनी मिसाइलें न केवल चीन बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ भी सुरक्षा तैयारियों का हिस्सा हैं।
भारत इस समय वैश्विक व्यापारिक और कूटनीतिक दबावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, जहां एक ओर वह क्वाड (अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ) का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर रूस और चीन के साथ रिश्तों को भी साधने की चुनौती है। ऐसे में अग्नि-5 परीक्षण भारत की उस बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, जो आने वाले वर्षों में एशियाई शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अग्नि-5 का सफल परीक्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापक रक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करना है। इस परीक्षण से संदेश स्पष्ट है कि नई दिल्ली न केवल पाकिस्तान बल्कि बीजिंग के दबाव का भी मजबूती से सामना करने के लिए तैयार है।
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