भारतीय नौसेना को अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित उथले जल के पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत ‘मालवान’ को मंगलवार (31 मार्च) को औपचारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया गया। यह आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) श्रृंखला का दूसरा पोत है।
ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा नाम
‘मालवान’ नाम मालवन से लिया गया है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की समृद्ध समुद्री विरासत से जुड़ा हुआ है। यह नाम भारतीय नौसेना के पुराने माइनस्वीपर INS मालवान की विरासत को आगे बढ़ाता है, जो वर्ष 2003 तक सेवा में रहा था।
इस युद्धपोत को भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के अनुसार पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और तैयार किया गया है। इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत विकसित किया गया है और इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस
करीब 80 मीटर लंबा और 1,100 टन वजन वाला यह पोत आधुनिक तकनीक से लैस है। इसमें वाटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम के साथ टॉरपीडो, मल्टी-फंक्शन एंटी-सबमरीन रॉकेट, उन्नत रडार और सोनार सिस्टम लगाए गए हैं। यह युद्धपोत समुद्र के भीतर निगरानी, तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी अभियानों, कम तीव्रता वाली समुद्री गतिविधियों और अन्य सामरिक मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है।
‘मालवान’ के निर्माण में देश के रक्षा उत्पादन इकोसिस्टम की अहम भूमिका रही है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र का भी योगदान शामिल है। यह परियोजना भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
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