स्टेशन की भागदौड़, ट्रेनों की आवाज और हजारों चेहरों के बीच सफर करता आम यात्री अक्सर सुरक्षा को लेकर असहज रहता है। अब इसी चिंता को कम करने के लिए Indian Railways ने बड़ा कदम उठाया है। उत्तर रेलवे के 400 प्रमुख स्टेशनों को डिजिटल सुरक्षा कवच से लैस किया जाएगा, जहां हर स्टेशन एक तरह से हाई-टेक डिजिटल थाना के रूप में काम करेगा।
रेल मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के लिए 16.47 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। रेलवे का उद्देश्य है कि स्टेशन परिसर में मौजूद हर यात्री खुद को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करे और अपराधियों के लिए रेलवे परिसरों में कोई सुरक्षित ठिकाना न बचे।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत स्टेशनों पर तैनात रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) जवानों को दुनिया की अत्याधुनिक फिंगरप्रिंट और आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैनिंग प्रणाली से लैस किया जाएगा।
यदि किसी संदिग्ध व्यक्ति को रोका जाता है, तो उसकी पहचान कुछ ही पलों में राष्ट्रीय डेटाबेस से मिलान कर ली जाएगी। इस प्रणाली की प्रमुख ताकत नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आईडेंटिफिकेशन सिस्टम (नफीस) और क्रिमिनल प्रोसीजर आईडेंटीफिकेशन (सीपीआई) है। इन तकनीकों की मदद से आरपीएफ जवान संदिग्ध के फिंगरप्रिंट और आइरिस को स्कैन करेंगे, जो सीधे राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा होगा। देशभर में दर्ज अपराधियों के डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान होते ही संबंधित व्यक्ति की पूरी आपराधिक जानकारी सामने आ जाएगी।
सभी चयनित 400 स्टेशनों पर फिंगरप्रिंट स्कैनर, आइरिस स्कैनर, विशेष वेब कैमरे और हाई-स्पीड वर्कस्टेशन स्थापित किए जाएंगे। कैमरों के जरिए चेहरों की मैपिंग की जाएगी, जिससे पहचान और अधिक सटीक हो सकेगी। यह तकनीक नाफिस और क्रिमिनल प्रोसीजर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम से जुड़ी होगी, जिससे देशभर में दर्ज अपराध रिकॉर्ड तुरंत जांचे जा सकेंगे।
डिजिटल थाने को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैनात किए जाएंगे। प्रोजेक्ट मैनेजर और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी पूरे सिस्टम की निगरानी करेंगे, जबकि सेंट्रल हेल्पडेस्क पर जूनियर तकनीकी विशेषज्ञ 24 घंटे मौजूद रहेंगे ताकि किसी तकनीकी खराबी से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
साथ ही मास्टर ट्रेनर्स आरपीएफ जवानों को नई तकनीक के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण देंगे, जिससे मशीन और मानव के बीच समन्वय बना रहे। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित सभी यात्रियों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। डिजिटल तकनीक के सहारे रेलवे अब सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद सफर का पर्याय बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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