मध्य प्रदेश में नाव पलटने की दुर्घटना के बाद जहां पूरे देश में शोक व्यक्त किया जा रहा है, वहीं इस हादसे को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। बरगी बांध में हुई इस दुर्घटना में बच गए यात्रियों ने शुक्रवार (1 मई)को बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद ‘नर्मदा क्वीन’ को चलाने की अनुमति दी गई थी और किसी भी यात्री को नाव में चढ़ने से पहले लाइफ-जैकेट पहनने के लिए नहीं कहा गया था। इस हादसे में अब तक कम से कम नौ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि छह लोग अभी भी लापता हैं। दूसरे दिन भी बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित 90 यात्रियों की क्षमता वाली ‘नर्मदा क्वीन’ नाव 2006 से सेवा में थी। गुरुवार शाम करीब 6 बजे तेज आंधी-तूफान के दौरान यह नाव 40 से अधिक पर्यटकों को लेकर जा रही थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि 29 टिकट जारी किए गए थे, लेकिन एक स्थानीय बचावकर्ता के अनुसार, यह दिन की आखिरी सवारी होने के कारण और भी लोगों को नाव में चढ़ने की अनुमति दी गई थी।
अपने तीन परिवारजनों के साथ नाव में सवार और हादसे से बच निकले राजेश सोनी ने कहा कि मौसम की चेतावनी को देखते हुए नाव संचालन रोक देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जो एक बड़ी गलती थी। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी सुरक्षित बच गए।
जबलपुर मौसम कार्यालय के अनुसार, गुरुवार को भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया था। भारतीय मौसम विभाग, भोपाल की वैज्ञानिक अभिलाषा श्रीवास्तव ने बताया, “30 अप्रैल की सुबह के पूर्वानुमान में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ तूफान की चेतावनी सभी जिला कार्यालयों को भेजी गई थी।”
राजेश सोनी ने बताया कि हालात बिगड़ने के बाद ही कर्मचारियों ने लाइफ-जैकेट ढूंढना शुरू किया। उन्होंने कहा,“नीचे रखे जैकेट लेने के लिए अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग पहन नहीं पाए। जिन्होंने पहन लिया, वे बच गए, बाकी लोग डूब गए।”
एक अन्य जीवित बची यात्री संगीता कोरी ने बताया कि नाव में चढ़ते समय लाइफ-जैकेट नहीं दी गई थी। “जब नाव चली, तब किसी के पास जैकेट नहीं था। जैसे ही पानी भरने लगा, उन्हें बांटने की कोशिश की गई, लेकिन इससे भगदड़ मच गई और कुछ ही क्षणों में नाव पलट गई,” उन्होंने कहा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नाव पलटने से 15-20 मिनट पहले से ही वे उसे वापस लौटने के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया। एक स्थानीय ने बताया,“अचानक नाव पलट गई और सभी लोग पानी में गिर गए। हममें से कुछ लोग तैरकर पहुंचे और कुछ को बचाया।”
एक जीवित बचे व्यक्ति ने आरोप लगाया कि नाव पलटने से पहले ही पायलट और कर्मचारी उसे छोड़कर भाग गए और यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया।
नौ परिवारजनों के साथ नाव में सवार वकील रोशन आनंद वर्मा ने बताया, “जब हम नाव में चढ़े, तब मौसम साफ था, लेकिन बीच में पहुंचते ही मौसम अचानक बदल गया। तेज हवाओं और ऊंची लहरों ने नाव को झकझोर दिया और केबिन में पानी भरने लगा। जैसे ही नाव नियंत्रण से बाहर हुई, पायलट और कर्मचारी खुद को बचाने के लिए कूद गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई।”
हालांकि, क्रूज पायलट महेश पटेल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा, “यात्रियों ने लाइफ-जैकेट लेने के लिए एक जगह भीड़ लगाई और कुछ ही सेकंड में नाव डूब गई। हादसे के एक घंटे बाद स्थानीय लोगों ने मुझे भी बचाया।”
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