जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में शनिवार (16 अगस्त)और रविवार (17 अगस्त)की दरमियानी रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। जंगलोट इलाके में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। यह पिछले चार दिनों में जम्मू-कश्मीर में दूसरी बार बादल फटने की घटना है। इससे पहले 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चशोती गांव में बादल फटने से 65 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से अधिक लोगों को बचाया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कठुआ की इस त्रासदी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,“कठुआ में बादल फटने की घटना के संबंध में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से बात की। स्थानीय प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है और एनडीआरएफ की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंच गई हैं। मोदी सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। हम जम्मू-कश्मीर के अपने बहनों और भाइयों के साथ मजबूती से खड़े हैं।”
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “कठुआ के कई इलाकों में बारिश के कारण हुए विनाशकारी भूस्खलन में हुई जान-माल की हानि से अत्यंत व्यथित हूं। यह त्रासदी मन को स्तब्ध कर देने वाली है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी।”
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, “मैंने पुलिस अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में बचाव व सहायता कार्यों का समन्वय और क्रियान्वयन करने के साथ-साथ मौके पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं और मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
स्थानीय प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में राहत व बचाव कार्य चला रही हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और कई इलाकों में अभी भी मलबा हटाने का काम जारी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर में बरसात के मौसम को और भयावह बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की आपदाएं जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी इलाकों में असंतुलित विकास के चलते और गंभीर हो सकती हैं।
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