ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भड़के आक्रोश के बाद पाकिस्तान के कराची में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर रविवार (1 मार्च) को हिंसक झड़पें हुईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई मुठभेड़ में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शन शिया संगठनों द्वारा आयोजित किए गए थे, जो सुल्तानाबाद से माई कोलाची की ओर मार्च करते हुए भारी सुरक्षा घेरे में मौजूद अमेरिकी दूतावास परिसर के निकट पहुंचने का प्रयास कर रहे थे। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने लगे तब प्रदर्शन ने हिंसक रूप लिया।
प्रशासन ने एमटी खान रोड सहित कई प्रमुख मार्गों को सील कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। अधिकारियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। यातायात पुलिस ने लोगों से इलाके से दूर रहने की अपील की, जबकि नशीम चौक समेत कई स्थानों पर टकराव की खबरें सामने आईं।
तनाव बढ़ने के साथ कुछ प्रदर्शनकारी दूतावास के प्रवेश द्वार तक पहुंच गए। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में भीड़ को प्रवेश क्षेत्र में तोड़फोड़ करते और भवन के कुछ हिस्सों में आग लगाते हुए देखा गया। बताया गया कि कुछ लोग मुख्य भवन में घुसने के लिए खिड़कियां और दरवाजे तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
Locals protesting stikes on Iran have stormed the entrance area of the US Consulate in Karachi, Pakistan. pic.twitter.com/fiqSoRRpPt
— OSINTtechnical (@Osinttechnical) March 1, 2026
प्रदर्शन ईरान में अमेरिकी-इजरायली हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद तेज हुआ। ईरानी सरकार ने इस्लामी लीडर की मौत के बाद 40 दिन के शोक की घोषणा की है। कराची के अलावा इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास के बाहर भी प्रदर्शन हुए। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कई देशों में विरोध की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों ने वॉशिंगटन पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया और विदेशी सैन्य हस्तक्षेप समाप्त करने की मांग की।
भारत के जम्मू-कश्मीर के रामबन में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाए। शिया समुदाय के नेता सैयद समर काज़मी ने खामेनेई की हत्या की निंदा करते हुए दावा किया कि ईरानी नेता को अमेरिका और इजरायल ने धोखे से मार दिया। उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब हमने अपने नेता को खोया है, लेकिन हम अपने प्रिय नेता की मौत को नहीं भूलेंगे। हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को बताएंगे कि अमेरिका और इजरायल ने हमारे नेता को धोखे से कैसे मारा… मुसलमानों का एक हिस्सा हमेशा पीड़ितों के लिए आवाज उठाता रहा है… उन्हें सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि उन्होंने फिलिस्तीन में हो रही हत्याओं के खिलाफ आवाज उठाई।”
फिलहाल कराची में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, जबकि क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
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“हम उन्हें ऐसी ताकत से मारेंगे जैसी पहले कभी नहीं देखी।”
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