आसम कोंग्रस की राजनीति में वरिष्ठ नेता और नगांव से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने तीन दशक पुराना साथ छोड़कर भाजपा से रिश्ता बनाने के बाद भूचाल आया है। दिलचस्प बात यह है कि कभी खुद बोरदोलोई ने कहा था कि “कांग्रेसियों जैसे हम लोग पार्टी कभी नहीं छोड़ सकते”, लेकिन अब उनका ही यह रुख बदल गया है। बुधवार (18 मार्च) को उन्होंने आधिकारिक तौर पर भाजपा की सदस्य्ता ली, आसाम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने किया।
बोरदोलोई के जाने से आसाम में कांग्रेस की स्थिति चरमरा गई है। अब राज्य से पार्टी के केवल दो लोकसभा सांसद गौरव गोगोई और रकीबुल हसन ही बचे हैं। संसद में भी कांग्रेस की कुल संख्या घटकर 98 रह गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बोरदोलोई का जाना सिर्फ संख्यात्मक नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान है। वह पार्टी के उन नेताओं में थे जिन्होंने जमीनी स्तर से राजनीति में पहचान बनाई।
इस्तीफे के बाद बोरदोलोई ने कहा, “आज मैंने अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को छोड़ दिया। लेकिन मैं लगातार अपमान और उपेक्षा का सामना कर रहा था… मैं खुद को अकेला और अलग-थलग महसूस कर रहा था।” उन्होंने आरोप लगाया कि आसाम कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी शिकायतों पर कोई सहानुभूति नहीं दिखाई।
बोरदोलोई के फैसले के पीछे 2025 में नगांव जिले के धिंग इलाके में उन पर हुए हमले को भी अहम वजह माना जा रहा है। इस हमले में वह घायल हो गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से जुड़े लोगों को बाद में पार्टी के भीतर संरक्षण मिला।
उन्होंने AICC महासचिव जीतेन्द्र सिंग को लिखे पत्र में लाहोरीघाट सीट को लेकर भी आपत्ति जताई थी। बोरदोलोई ने दावा किया कि जिन लोगों पर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए, उन्हें ही पार्टी में महत्व दिया गया। बोरदोलोई ने कहा कि कांग्रेस द्वारा सांप्रदायिक तत्वों को बढ़ावा देना उनके लिए आखिरी झटका साबित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ फैसलों ने उन्हें असहज कर दिया और उन्हें लगा कि अब पार्टी में रहना संभव नहीं है।
Congress has become so arrogant that even its sitting MPs feel humiliated inside party forums. Pradyut Bordoloi quit after enduring repeated insults and seeing zero action against elements he called out as communal and criminal. The writing is on the wall. pic.twitter.com/IrFxhnz2ML
— Hindutva Knight (@HPhobiaWatch) March 18, 2026
बोरदोलोई का राजनीतिक करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। तरुण गोगोई की सरकार में वह मंत्री रह चुके हैं और उद्योग व ऊर्जा जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं। वह चार बार मरघेरिटा से विधायक और दो बार नगांव से सांसद रहे हैं। 2019 और 2024 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता।
भाजपा में शामिल होने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि बोरदोलोई को आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी संकेत दिया है कि पार्टी उनके अनुभव का उपयोग करेगी। बोरदोलोई का यह कदम कांग्रेस में गौरव गोगोई और रकीबुल हसन के प्रदेश की राजनीती संभालने का मिज़ाज बताती है। साथ ही, यह भी दिखाता है कि पार्टी अपने अनुभवी नेताओं को संभालने में लगातार संघर्ष कर रही है, जबकि वंशवाद से उभरे नेता पार्टी से बढ़कर फैसले ले रहें।
आसाम में तेजी से मजबूत होती भाजपा के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक लाभ है।
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