मुंबई इस समय भारी मानसूनी बारिश से जूझ रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शहर और आसपास के जिलों को 19 अगस्त तक ऑरेंज अलर्ट पर रखा है। वहीं, रायगढ़, रत्नागिरी, सतारा, कोल्हापुर और पुणे जैसे कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां अति भारी वर्षा की आशंका जताई गई है।
सोमवार (18 अगस्त) सुबह से ही लगातार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। विले पार्ले के पास वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर ट्रैफिक धीमा पड़ा, जबकि सेंट्रल और हार्बर रेलवे लाइनों पर भी देरी देखने को मिली। नालासोपारा और वडाला जैसे इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही। सबसे ज्यादा असर बांद्रा और साउथ मुंबई में दिखा, जहां तेज बारिश ने महज एक घंटे में करीब 80 मिमी पानी गिराया।
इंडिगो, एयर इंडिया और अकासा इन एयरलाइंस ने यात्रियों को एडवाइजरी जारी कर हवाईअड्डे तक पहुंचने में अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी है, क्योंकि एयरपोर्ट जाने वाले कई रास्तों पर पानी भर गया है।
मुंबई की प्यास बुझाने वाली सात झीलों में पानी का स्तर 91.18% तक पहुंच गया है। 18 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, अप्पर वैतरणा 87.13% क्षमता पर है, जबकि मोदक सागर 86.61% भर चुका है और इसमें 36 मिमी बारिश दर्ज की गई है। तंसा लगभग पूरी तरह भरकर 98.81% पर है, वहीं मिडल वैतरणा 97.34% तक पहुंच चुकी है। भात्सा 89.82% पर है, जबकि विहार झील 95.16% क्षमता पर दर्ज की गई है। तुलसी झील 16 अगस्त से ही लबालब होकर लगातार ओवरफ्लो कर रही है।
कुल मिलाकर मुंबई के पास इस समय 13.19 लाख मिलियन लीटर जलसंग्रह है, जो बढ़ती मांग के बावजूद शहर को तत्काल जल संकट से बचाने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 93.04% था, यानी इस बार थोड़ा कम है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर लगातार बारिश जारी रही तो बांधों से नियंत्रित जल छोड़ना पड़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। मौसम विभाग ने भी नागरिकों को अलर्ट रहने को कहा है, क्योंकि थोड़े समय में होने वाली तेज बारिश जलभराव, यातायात बाधित होने और सामान्य जीवन में रुकावट का कारण बन सकती है।
अब तक मुंबई को इस मानसून सीजन में औसत वार्षिक वर्षा का 64% मिल चुका है। पूर्वी उपनगर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जहां अब तक 1,534 मिमी बारिश दर्ज की गई है। आने वाले दो दिनों तक अलर्ट जारी है और प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
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