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Wednesday, January 21, 2026
होमन्यूज़ अपडेटफिर बीच रास्ते में अटकी मुंबई मोनोरेल, बचाए गए 17 यात्री!

फिर बीच रास्ते में अटकी मुंबई मोनोरेल, बचाए गए 17 यात्री!

फायर ब्रिगेड की देरी पर उठे सवाल

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सोमवार(15 सितंबर) सुबह मुंबई मोनोरेल में एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई, जब यात्रा कर रही एक ट्रेन अचानक बीच रास्ते में रुक गई। इस दौरान 17 यात्री अंदर फंसे रहे। हालांकि तकनीकी टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन फायर ब्रिगेड की देर से पहुंची टीम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।mumbai-monorail-breakdown-17-passengers-rescued

यह हादसा सुबह करीब 7 बजे संत गाडगे महाराज चौक से चेंबूर जा रही मोनोरेल पर हुआ। ट्रेन मुकुंद्राव आंबेडकर रोड जंक्शन के पास अचानक रुक गई। 17 यात्री ट्रेन में सवार थे। मोनोरेल की तकनीकी टीम ने तुरंत कार्रवाई कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। बाद में रुकी हुई ट्रेन को कपलिंग के जरिए वडाला ले जाया गया। सौभाग्य से किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

फायर ब्रिगेड की देरी पर सवाल

मौके पर मौजूद सूत्रों के मुताबिक, फायर ब्रिगेड टीम आधे घंटे से ज्यादा देर से पहुंची। इससे पहले भी एक ऐसी ही घटना में फायर ब्रिगेड टीम लगभग एक घंटे की देरी से आई थी, जब दो मोनोरेल फंस गई थीं और सैकड़ों यात्रियों को बचाना पड़ा था। बार-बार हो रही इस देरी से यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं उठ रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी आपात स्थितियों में मोनोरेल की बैकअप बैटरी एसी और लाइट्स तो चलाती हैं, लेकिन लंबा समय बीतने पर यह सिस्टम बंद हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को सांस लेने में दिक्कत और वेंटिलेशन की कमी झेलनी पड़ सकती है। सोमवार की घटना में भी यात्रियों ने इसी तरह की शिकायत की।

सिस्टम सुधार की जरूरत

अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक से लैस मोनोरेल रेक्स खरीदी गई हैं, लेकिन अभी वे सुरक्षा परीक्षणों से गुजर रही हैं। 17 किलोमीटर लंबे इस मोनोरेल नेटवर्क (चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक) पर फिलहाल रोजाना 118 ट्रिप होती हैं और हर 18 मिनट पर ट्रेनें चलती हैं। बावजूद इसके, यात्री संख्या सीमित है सप्ताह के दिनों में करीब 16,000 और वीकेंड पर महज 10,000।

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने मेडा सर्वो रेल प्राइवेट लिमिटेड से 10 नए रेक्स मंगवाए हैं, जिनकी लागत करीब 58.9 करोड़ रुपये प्रति रेक है। इनमें से कुछ रेक्स ट्रायल रन पर हैं।

लगातार हो रही तकनीकी गड़बड़ियां और आपातकालीन सेवाओं की देरी से यात्री चिंतित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गंभीर हादसा हुआ तो मौजूदा तैयारी नाकाफी साबित हो सकती है। यात्रियों और स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि MMRDA और फायर ब्रिगेड मिलकर आपदा प्रबंधन की कार्ययोजना पर तुरंत काम करें, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को टाला जा सके।

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