मुंबई के आज़ाद मैदान समेत कई जगहों पर शुक्रवार को पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से सभी आवारा कुत्तों को आठ हफ्तों के भीतर हटाकर शेल्टर में भेजने का निर्देश दिया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने इस आदेश को अव्यावहारिक और अमानवीय करार दिया। उनका कहना था कि इससे निर्दोष जानवरों को अनावश्यक कष्ट झेलना पड़ेगा। उन्होंने बड़े पैमाने पर नसबंदी, टीकाकरण अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम जैसी वैकल्पिक योजनाओं की मांग की। कई लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर लिखा था, “जानवरों को भी आज़ादी का हक है, जैसे इंसानों को है।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा एक वीडियो में एक प्रदर्शनकारी ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि “बलात्कारियों और अपराधियों को तो खुला छोड़ दिया जाता है, लेकिन बेआवाज़ कुत्तों को निशाना बनाया जा रहा है।” उन्होंने इस कदम को अन्यायपूर्ण और अमानवीय बताया, और इंसानों बनाम जानवरों के प्रति न्याय के रवैये में अंतर को उजागर किया।
इस आदेश के बाद दिल्ली नगर निगम (DMC) अब तक 100 आवारा कुत्तों को पकड़ चुका है और 20 एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्रों को अस्थायी शेल्टर में बदल दिया गया है। महापौर राजा इकबाल सिंह ने बताया कि बाहरी दिल्ली में 85 एकड़ जमीन आवारा जानवरों के लिए आरक्षित की गई है, साथ ही और जमीन तलाश की जा रही है। योजना के तहत सबसे पहले आक्रामक, रेबीज़-ग्रस्त या बीमार कुत्तों को शेल्टर में भेजा जाएगा, फिर क्षमता बढ़ने पर अन्य कुत्तों को भी वहां लाया जाएगा। द्वारका स्थित ABC केंद्र को बड़ा करने और आगे चलकर घोघा डेयरी में बड़े शेल्टर बनाने की भी योजना है। सिंह ने कहा कि यह कदम कुत्तों के काटने से परेशान नागरिकों को “बड़ी राहत” देगा।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि खासकर बच्चों में बढ़ते रेबीज़ के मामले गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट हैं। अदालत ने अधिकारियों को तय समय सीमा में सभी कुत्तों को उचित शेल्टर में पहुंचाने का आदेश दिया। DMC ने आश्वासन दिया है कि पकड़े गए कुत्तों को बदले गए ABC केंद्रों में पर्याप्त सुविधाएं दी जाएंगी, ताकि इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें न्यूनतम परेशानी हो।
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