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Tuesday, January 20, 2026
होमन्यूज़ अपडेटPOK में हिंसक प्रदर्शन; 1 की मौत, कई घायल; मोबाइल-इंटरनेट सेवा बंद!

POK में हिंसक प्रदर्शन; 1 की मौत, कई घायल; मोबाइल-इंटरनेट सेवा बंद!

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मीरपुर–मुझफ्फराबाद क्षेत्र में सोमवार (29 सितंबर) को हालात अचानक बिगड़ गए जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) की हड़ताल हिंसक हो गई। झड़पों में एक युवक की मौत हो गई जबकि एक पुलिसकर्मी सहित दर्जनभर से अधिक लोग घायल हुए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं, जो बुधवार तक निलंबित रहने की आशंका है।

मृतक की पहचान 30 वर्षीय मोहम्मद सुदीर, ताहली मंडी रोड पर बर्तन की दुकान चलाने वाले दुकानदार, के रूप में हुई। चश्मदीद ग़ुलाम मुस्तफ़ा ने बताया,“अचानक फायरिंग हुई और एक गोली सुदीर को लग गई। जब तक हम सीएमएच अस्पताल पहुंचे, वह अत्यधिक खून बहने से बेहोश हो चुके थे।” डॉक्टरों ने बाद में उनकी मौत की पुष्टि की।

हिंसा का केंद्र नीलम ब्रिज बना, जहां मुस्लिम कॉन्फ्रेंस नेता राजा साक़िब मजीद की अगुवाई में निकाली गई तथाकथित अमन रैली की भिड़ंत JKJAAC कार्यकर्ताओं से हो गई। स्थानीय दुकानदार मोहम्मद बशारत (50) शरापनेल से घायल हुए। उनका आरोप है कि रैली के काफिले को रास्ता देने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों पर अचानक हमला किया गया।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि रैली को पुलिस व अर्धसैनिक बल का संरक्षण मिला हुआ था, और भीड़ पर आंसू गैस व गोलियां चलाई गईं। घायलों के पास से खर्च हो चुकी गोलियों के खोल भी बरामद हुए। पूरे मुझफ्फराबाद में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। रावलकोट और सुधनोटी में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए, जबकि भीमर में पीएम चौधरी अनवरुल हक़ के भाई और पीटीआई नेता एहसानुल हक़ के नेतृत्व में रैली निकाली गई।

संध्या को सैकड़ों लोग लाल चौक पर जमा हुए, जहां JKJAAC नेता शौकत नवाज़ मीर ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “कुछ ताकतें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 9 मई जैसी स्थिति दोहराने की साज़िश कर रही हैं। सेना प्रमुख को तुरंत स्थिति पर नज़र रखनी चाहिए।” उन्होंने मंगलवार सुबह 11 बजे पुनः एकत्र होने का आह्वान किया। दूसरी ओर, संचार पाबंदियों के कारण न तो पुलिस और न ही राजा साक़िब मजीद की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आ सकी।

JKJAAC की यह हड़ताल पाकिस्तानी शरणार्थियों के लिए सुरक्षित सीटें और विशेषाधिकार खत्म करने तथा आम जनता की मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में बुलाई गई थी। सरकार से पिछले सप्ताह वार्ता असफल रही थी, जिसके बाद यह बंद घोषित हुआ।

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