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PSLV-C62 मिशन में तीसरे चरण के दौरान तकनीकी विचलन, ISRO कर रहा है डेटा का विश्लेषण

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) मिशन के सोमवार (12 जनवरी) को लॉन्च के बाद तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ा। ISRO ने पुष्टि की है कि रॉकेट के तीसरे चरण (Stage-3) के दौरान एक विचलन (anomaly) दर्ज किया गया, जिसके बाद मिशन के डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।

ISRO के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि मिशन से जुड़ा पूरा टेलीमेट्री डेटा जांचा जा रहा है और विस्तृत जानकारी जल्द साझा की जाएगी। उन्होंने फिलहाल मिशन को न तो पूरी तरह सफल और न ही असफल घोषित किया है। ISRO का कहना है कि सभी निष्कर्ष डेटा विश्लेषण पूरा होने के बाद ही सार्वजनिक किए जाएंगे।

ISRO का यह मिशन PSLV-C62 / EOS-N1, PSLV की 64वीं उड़ान थी, जिसने सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। यह उड़ान PSLV के लिए विशेष रूप से अहम मानी जा रही थी, क्योंकि 2025 में इस लॉन्च व्हीकल को असफलता का सामना करना पड़ा था, और यह मिशन उसकी विश्वसनीयता की दृष्टि से महत्वपूर्ण था।

PSLV-C62 कुल 15 उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष में गया था। इनमें प्रमुख EOS-N1 के अलावा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित निगरानी उपग्रह ‘अन्वेषा (Anvesha)’ भी शामिल था। मिशन प्रोफाइल के अनुसार, EOS-N1 और उसके साथ गए 14 सह-यात्री उपग्रहों को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित किया जाना था, जबकि Kestrel Initial Demonstrator (KID) उपग्रह को पुनः प्रवेश (re-entry) पथ पर भेजने की योजना थी।

DRDO द्वारा विकसित अन्वेषा उपग्रह उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस है। इसका उद्देश्य उच्च सटीकता के साथ रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करना एवं मैपिंग क्षमता को मजबूत करना है, जिससे भारत की रक्षा और सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों को महत्वपूर्ण समर्थन मिलने की उम्मीद है।

यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी एक अहम पड़ाव रहा। पहली बार किसी एक निजी भारतीय कंपनी ने PSLV मिशन में इतने बड़े स्तर पर भागीदारी की। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस (Dhruva Space) ने इस मिशन में सात उपग्रहों का योगदान दिया था, जो देश के उभरते निजी अंतरिक्ष उद्योग की बढ़ती भूमिका और क्षमता को दर्शाता है।

ISRO अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल मिशन से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की जा रही है। एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि विश्लेषण पूरा होते ही मिशन की स्थिति और आगे की कार्रवाई पर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी।

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