पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव अभी भी जारी है और पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के लिए भारत अब एक और कदम उठाने जा रहा है। भारत के फैसले से गर्मियों की शुरुआत में ही पाकिस्तान की पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है। सिंधु जल बंटवारा संधि के निलंबन से पाकिस्तान पहले ही मुश्किल में है, और अब भारत 31 मार्च तक शाहपुर कांडी बांध का निर्माण कार्य पूरा कर रावी नदी से जाने वाले अतिरिक्त जलप्रवाह को रोकने की तैयारी में है। पिछले कुछ वर्षों से भारत की ओर पर्याप्त भंडारण क्षमता न होने के कारण रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान तक पहुंच जाता था। अब अप्रैल से यह स्थिति बदलने वाली है, जिससे पाकिस्तान की ओर जाने वाला जलप्रवाह और कम हो जाएगा।
सोमवार (16 फरवरी) को जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सूखाग्रस्त कठुआ और सांबा जिलों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। पाकिस्तान की ओर जाने वाले अतिरिक्त पानी को रोका जाएगा और इसे रोका ही जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि इसका पाकिस्तान पर क्या प्रभाव पड़ेगा, तो उन्होंने जवाब दिया, “आपको पाकिस्तान की चिंता क्यों है? उन्हें अपनी समस्याओं में रोने दीजिए।”
वर्तमान में रावी नदी का अतिरिक्त पानी माधोपुर से बिना उपयोग के पाकिस्तान में बह जाता है। राणा ने कहा कि शाहपुर कांडी बांध, जो राजनीतिक उपेक्षा और पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर के बीच मतभेदों के कारण वर्षों से लंबित था, अब इस जल अपव्यय को रोकेगा। यह घोषणा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल के उस बयान के एक सप्ताह बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि फिलहाल पाकिस्तान की ओर बहने वाले सिंधु नदी के पानी को रोका जाएगा और भारत के हित में उपयोग किया जाएगा।
पाकिस्तान को विरोध जताने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि यह बांध सिंधु जल संधि (IWT) के दायरे में नहीं आता, क्योंकि रावी नदी, जो सिंधु की तीन पूर्वी नदियों में से एक है, पर भारत का पूर्ण अधिकार है। विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई संधि के अनुसार भारत को सतलुज, ब्यास और रावी के जल का पूर्ण उपयोग करने की अनुमति है, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया था। पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले में हिंदू पर्यटकों को मारा गया था, जिसके बाद हालात बदल गए हैं। भारत ने तेजी से कदम उठाते हुए जल संधि को रद्द किया और नदी जल के बेहतर उपयोग व नियंत्रण के लिए जलविद्युत परियोजनाओं और बांधों का कार्य तेज कर दिया।
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