26 जनवरी 2026 को देश 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस अवसर पर भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की यात्रा केंद्रीय बजट के आंकड़ों में साफ झलकती है। जहां स्वास्थ्य पर केंद्र सरकार का आवंटन मात्र ₹2,000–3,000 करोड़ के आसपास था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए यह राशि बढ़कर लगभग ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह बढ़ोतरी नीति सुधारों, बड़े कार्यक्रमों और आपात स्थितियों के दौरान की गई कोशिशों का नतीजा है।
भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य बजट की यात्रा पिछले ढाई दशकों में बड़े नीतिगत फैसलों, आपात स्थितियों और संरचनात्मक सुधारों से होकर गुज़री है। वर्ष 2000-01 में जहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (मुख्य रूप से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग) के लिए केंद्रीय आवंटन महज ₹2,000–3,000 करोड़ के आसपास था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में यह राशि बढ़कर लगभग ₹99,859 करोड़ तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी करीब 12 गुना से अधिक की है, जो भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में आए व्यापक बदलावों को दर्शाती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत का स्वास्थ्य बजट
- 2000-01 (लगभग): ~2,000–3,000 करोड़ (बहुत कम बेस, बड़ी योजनाओं से पहले)
- 2004-05: ~8,000 करोड़
- 2006-07 (PRS में बताया गया RE): ~11,366 करोड़
- 2011-12: ~26,760 करोड़
- 2017-18: 47,353 करोड़
- 2020-21 (COVID से प्रभावित): BE ~53,000–64,000 करोड़ (इमरजेंसी खर्च के कारण RE/एक्चुअल काफी ज़्यादा)
- 2023-24: BE 86,175 करोड़ (डिपार्टमेंट H&FW); मिनिस्ट्री एक्चुअल ~83,149 करोड़
- 2024-25: RE मिनिस्ट्री ~89,974 करोड़ (डिपार्टमेंट H&FW RE ~86,582 करोड़)
- 2025-26: BE मिनिस्ट्री 99,859 करोड़ (डिपार्टमेंट H&FW BE ~95,958 करोड़)
नीतिगत फैसलों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) की शुरुआत के बाद ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे, आशा कार्यकर्ताओं और बुनियादी सुविधाओं पर बड़ा निवेश हुआ। 2018 में आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की शुरुआत ने बजट में नई छलांग लगाई। पीएम-जन औषधी योजना के लिए 2025-26 में ₹9,406 करोड़ का प्रावधान किया गया, जो पिछले संशोधित अनुमान से 24 प्रतिशत अधिक रहा।
2020 से 2022 के बीच कोविड-19 महामारी ने स्वास्थ्य खर्च को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचाया। टीकाकरण, जांच, उपचार, ऑक्सीजन संयंत्रों और स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाए गए। इसी दौर में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन की शुरुआत की गई।
आंकड़ों पर नजर डाले तो केंद्रीय स्वास्थ्य बजट GDP का सिर्फ़ ~0.3% रहा था, 2000 के दशक की शुरुआत में केंद्र और राज्य मिलाकर कुल सरकारी स्वास्थ्य खर्च GDP के ~0.9% था। यह अब बढ़कर हाल के NHA अनुमानों में 1.3–1.5%+ हो चूका है, इनमें राज्यों का ज़्यादा योगदान भी बढ़ा है। कुल स्वास्थ्य खर्च में सार्वजनिक खर्च का हिस्सा काफी बेहतर हुआ है, फिर भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
इस गणतंत्र दिवस पर, जब भारत अपने लोकतांत्रिक संकल्प और प्रगति को दिखा रहा है। पोलियो खत्म करने और टीकाकरण बढ़ाने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य कवरेज कार्यक्रमों में से एक बनाने तक, स्वास्थ्य बजट मानव पूंजी में लगातार निवेश का संकेत देता है। बढ़ती गैर-संक्रामक बीमारियों, बढ़ती उम्र की आबादी और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा ज़रूरतों के साथ, इस गति को बनाए रखना और तेज़ करना एक स्वस्थ, अधिक न्यायसंगत विकसित भारत को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है।
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