देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज़ के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार(7 नवंबर) को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, खेल सुविधाओं, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के आसपास से आवारा कुत्तों को पूरी तरह हटाया जाए और उन्हें टीकाकरण व नसबंदी के बाद शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाए।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा, क्योंकि ऐसा करने से आदेश का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने क्षेत्र के सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों और खेल परिसरों की सूची तैयार करें। जिलाधिकारियों (DMs) को आदेश दिया गया है कि ऐसे संस्थान सुरक्षित रूप से घिरे हों, ताकि कुत्ते प्रवेश न कर सकें। संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण करने होंगे। जहाँ भी आवारा कुत्ते पाए जाएँ, उन्हें तुरंत शेल्टर में भेजा जाए।
दरअसल यह आदेश उस सुओ मोटो मामले का हिस्सा है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को दर्ज किया था, जब मीडिया ने बच्चों पर कुत्तों के हमलों और बढ़ती मौतों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने पशुओं को खाना खिलाने के नाम पर संस्थानों में कुत्तों को बढ़ावा देने वाले कर्मचारियों पर चिंता व्यक्त की थी। पिछले महीने अदालत ने पशु जन्म नियंत्रण नियमों के अनुपालन में देरी पर लगभग सभी राज्यों को फटकार लगाई थी।
अदालत ने कहा था कि लगातार हो रही घटनाएँ “देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब कर रही हैं।” मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।
इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को दोहराते हुए निर्देश दिया कि, हाईवे और मुख्य सड़कों से भी आवारा मवेशियों और अन्य जानवरों को हटाने के आदेश दिए है। नगर निकाय, परिवहन विभाग और NHAI मिलकर संयुक्त सर्वे करें। 24×7 हाइवे पेट्रोल टीमें बनें। हाईवे पर हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएँ।सभी राज्यों को गौशालाएँ और पशु-शरणालय स्थापित करने होंगे।
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