केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, कृषि विविधीकरण और ग्रामीण रोज़गार सृजन को प्राथमिकता देते हुए मत्स्य पालन, पशुपालन और हाई-वैल्यू कृषि पर विशेष जोर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कृषि क्षेत्र को पारंपरिक फसलों से आगे ले जाकर मूल्यवर्धित और आय-उन्मुख गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों की आमदनी टिकाऊ तरीके से बढ़ाई जा सके।
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा, “खेती में अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट लाने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए, हम कोस्टल इलाकों में नारियल, काजू, कोको जैसी ज़्यादा कीमत वाली चीज़ों और अखरोट और मूंगफली जैसे नट्स को सपोर्ट करेंगे।”। सरकार का लक्ष्य है कि तटीय और पर्वतीय क्षेत्रों में क्षेत्र-विशेष फसलों को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूती दी जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता उत्पादकता बढ़ाकर और उद्यमिता को प्रोत्साहित कर किसान आय में वृद्धि करना है, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं को आजीविका के नए अवसर, प्रशिक्षण और उच्च-गुणवत्ता वाले सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाने की बात कही गई है।
बजट में कमजोर वर्गों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर तक पहुंच बढ़ाने की योजना का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही, सरकार ने गरीब वर्गों, पिछड़े राज्यों और पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष फोकस करते हुए विकास और रोज़गार सृजन को तेज़ करने का लक्ष्य रखा है।
मत्स्य पालन में 500 जलाशयों के विकास की योजना
मत्स्य पालन क्षेत्र में सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश का संकेत दिया है। बजट के अनुसार, तटीय क्षेत्रों में 500 जलाशयों और अन्य जल निकायों के एकीकृत विकास की पहल की जाएगी, ताकि मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मज़बूत किया जा सके। इसके तहत स्टार्टअप्स, महिला-नेतृत्व वाले समूहों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशंस (FFPOs) के साथ बाज़ार से जुड़ाव को बढ़ाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे मछुआरों की आय बढ़ेगी, प्रसंस्करण और विपणन में सुधार होगा और तटीय इलाकों में रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
पशुपालन में क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी और वैल्यू चेन विस्तार
पशुपालन क्षेत्र में बजट 2026 ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोज़गार सृजन पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम के ज़रिये पशुधन उद्यमों को आधुनिक और बड़े पैमाने पर विकसित करने की योजना है। सरकार एकीकृत पशुपालन-डेयरी-पोल्ट्री वैल्यू चेन तैयार करने और लाइवस्टॉक किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने पर भी काम करेगी।
हाई-वैल्यू कृषि से नई संभावनाएं
हाई-वैल्यू कृषि के तहत नारियल, काजू, कोको, अखरोट और पाइननट्स जैसी फसलों के साथ-साथ चंदन जैसी विशेष फसलों को समर्थन देने का ऐलान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे फसल लेने में विविधीकरण आएगा, उत्पादकता वृद्धि और नई रोज़गार संभावनाओं का सृजन होगा।
केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा,”नारियल उत्पादन में कॉम्पिटिशन को और बढ़ाने के लिए, मैं एक नारियल प्रमोशन स्कीम का प्रस्ताव करता हूँ ताकि प्रमुख नारियल उगाने वाले राज्यों में अलग-अलग तरीकों से उत्पादन बढ़ाया जा सके और प्रोडक्टिविटी बेहतर की जा सके, जिसमें पुराने पेड़ों की जगह नई किस्म के पौधे लगाना शामिल है। भारतीय काजू और कोको के लिए एक खास प्रोग्राम का प्रस्ताव है ताकि भारत कच्चे काजू और नारियल के उत्पादन और प्रोसेसिंग में आत्मनिर्भर बन सके, एक्सपोर्ट में कॉम्पिटिशन बढ़े और 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बनाया जा सके।”



