शरीर में बनने वाले रसायनों में यूरिक एसिड एक अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब इसका स्तर असामान्य रूप से बढ़ने या घटने लगता है, तो यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यूरिक एसिड का असंतुलन गठिया, पथरी और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी दिक्कतों का कारण बन सकता है।
दरअसल, हमारे शरीर और आहार में मौजूद प्यूरिन नामक रसायन के टूटने पर यूरिक एसिड बनता है। प्यूरिन डीएनए और आरएनए कोशिकाओं का हिस्सा होता है। सामान्य स्थिति में किडनी यूरिक एसिड को मूत्र के जरिए बाहर निकाल देती है। लेकिन अगर यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाए तो यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है और शरीर में दर्द, सूजन और जोड़ों की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
बीन्स, मटर, मशरूम, मांस, चाय और कॉफी जैसे खाद्य पदार्थों में यूरिक एसिड पाया जाता है। इनका अधिक सेवन भी असंतुलन को बढ़ा सकता है। वहीं, सरसों या रिफाइंड तेल की जगह ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल, हरी पत्तेदार सब्जियों, विटामिन सी और फाइबर युक्त फलों का सेवन यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में मददगार है।
आयुर्वेद में इस समस्या को ‘वातरक्त’ कहा गया है, जो रक्त और वात के असंतुलन से उत्पन्न होती है। आयुर्वेद के अनुसार, पंचकर्म चिकित्सा इसमें काफी लाभकारी होती है। इसके अलावा कुछ घरेलू उपाय भी कारगर साबित होते हैं। रोजाना नारियल पानी का सेवन यूरिक एसिड के स्तर को संतुलित करता है, वहीं अजवाइन का पानी सुबह खाली पेट पीने से शरीर को काफी फायदा होता है। इसी तरह एप्पल साइडर विनेगर को एक गिलास पानी में दो चम्मच मिलाकर दिन में दो बार लेने से यूरिक एसिड से होने वाली तकलीफ में राहत मिल सकती है।
नियमित योग और व्यायाम भी इस समस्या को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। शरीर को एक्टिव रखना और पर्याप्त पानी पीना यूरिक एसिड को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने में मदद करता है। डॉक्टरों का कहना है कि सही आहार, योग और आयुर्वेदिक उपायों से यूरिक एसिड के असंतुलन को काबू में रखकर कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
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