आसाम की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले आखिरकार वह मोड़ आ गया है, जिसका अंदाजा विशेषज्ञ महीनों से लगा रहे थे। पूर्व आसाम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने 16 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद आखिरकार साफ कर दिया कि वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। उनके इस फैसले ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
मंगलवार, 17 फरवरी को मीडिया से बातचीत में बोरा ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति धुबरी से लोकसभा सांसद Rरकीबुल हुसैन के हाथों में केंद्रित है।
बोरा ने कहा, “APCC अब APCC-R है, जो मेरे लिए मुश्किल है। मैं APCC का हिस्सा बनना चाहता हूं, लेकिन APCC-R का नहीं। यह एक पार्टी के एक गुट जैसा है। सालों से कांग्रेस में मेरे जो करीबी रहे हैं, मैंने उनसे कहा है कि अगर आप कांग्रेस में बने रहना चाहते हैं, तो APCC में मत रहो, आपको APCC-R में रहना होगा।” उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर कई नेता खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं, लेकिन खुलकर सामने नहीं आ पा रहे।
नवंबर 2024 में हुए समागुड़ी उपचुनाव का जिक्र करते हुए बोरा ने कहा, “हुसैन के बेटे तंज़िल को इस सीट से इसलिए नॉमिनेट किया गया क्योंकि हुसैन लोकसभा चले गए थे।” यह सीट अंततः भाजपा के दिपलू रंजन सरमा ने जीत ली थी।
बोरा ने खुलासा किया कि वह स्वयं समागुड़ी से चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने कहा,”अगर मैं सच में APCC प्रेसिडेंट होता, अगर मैंने सामगुरी से उपचुनाव लड़ा होता, तो क्या यह पार्टी के फायदे के लिए नहीं होता?” भूपेन बोरा ने खुलासा किया की, नेता देबब्रत सैकिया और पाबन सिंह घाटोवार ने भी उन्हें चुनाव लड़ने की सलाह दी थी।
16 फरवरी की सुबह बोरा ने कांग्रेस अध्यक्ष मलिक्कार्जुन खड़गे और सुप्रीम नेता राहुल गांधी को अपना इस्तीफा सौंपा था। इसके बाद गुवाहाटी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और कई वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने उनके आवास पहुंचे।
उनसे मिलने वालों में लोकसभा सांसद गौरव गोगोई, AICC के आसाम प्रभारी जितेंद्र सिंग, नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया, सांसद प्रद्युत बोर्डोलोई और एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव मनोज चौहान शामिल थे। उस समय जितेंद्र सिंह ने कहा था कि बोरा का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है और बोरा ने भी अंतिम निर्णय के लिए समय मांगा था।
हालांकि, एक दिन के भीतर उन्होंने सार्वजनिक रूप से भाजपा में शामिल होने का निर्णय घोषित कर दिया। चुनाव आयोग ने अभी विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है। 55 वर्षीय बोरा को मई 2025 में प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर उनकी जगह गौरव गोगोई को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह लंबे समय तक असम में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उनके भाजपा में जाने के फैसले को राज्य की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
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