तथागत रॉय ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जब हमारा संविधान तैयार और लागू किया गया था, तो अनुच्छेद 44 में ही यह कहा गया था कि राज्य समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने का प्रयास करेगा। अब यह सवाल कैसे उठ सकता है कि यूसीसी कितना जरूरी है? यह उतना ही जरूरी है जितना कि खुद संविधान।”
उन्होंने कहा, “पिछली सरकार ने भ्रम और गलतफहमियां फैलाईं। मैं यह कहना चाहूंगा कि ऐसा जानबूझकर किया गया था। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की कोई विचारधारा या सिद्धांत नहीं थे। उनका एकमात्र मकसद किसी भी तरह सत्ता में बने रहना और इस दौरान लोगों की जेबों व सरकारी खजाने से जितना हो सके पैसा निकालकर अपनी जेबें भरना था। यही उनका एकमात्र उद्देश्य था।”
जब उनसे पूछा गया कि यूसीसी की ड्राफ्टिंग कमिटी में चुने जाने पर वे क्या कहना चाहेंगे, तो तथागत रॉय बोले, “इस बारे में मैं क्या कहूं? मैंने किसी से भी मुझे कमेटी में शामिल करने के लिए नहीं कहा था। मुख्यमंत्री को यह सही लगा और उन्होंने मेरा नाम शामिल किया और मैं इसके लिए आभारी हूं।”
सुवेंदु अधिकारी के कार्यकाल पर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने कहा, “क्या किसी सरकार के कामकाज का मूल्यांकन दो महीने के भीतर किया जा सकता है? क्या सिर्फ दो महीनों में उसे परखना मुमकिन है? इसके लिए कम से कम एक साल का समय दिया जाना चाहिए। हालांकि, इन दो महीनों में इस सरकार ने जिस तरह से काम किया है, मैं उसकी तारीफ करता हूं।”
उन्होंने कहा, “मैं इसकी तारीफ इसलिए करता हूं, क्योंकि चुनावी घोषणापत्र में एक बात यह कही गई थी कि पहले ‘शासक का शासन’ था, लेकिन अब ‘कानून का शासन’ होगा। मुख्यमंत्री ने इसे लागू किया है और काम करके दिखाया भी है। इसे लागू करने के तहत अपराधियों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता कि वे हिंदू हैं या मुसलमान।”
बरूईपुर की घटना का जिक्र करते हुए तथागत रॉय ने कहा, “इस घटना के आरोपियों में अधिकांश हिंदू हैं, लेकिन इन सभी को गिरफ्तार किया गया। यही कानून का शासन है।”
उन्होंने कहा, “तृणमूल सरकार में चोरी हुई। चोरी करने वाले टीएमसी नेताओं में सब्यसाची दत्ता और पार्थ चटर्जी शामिल थे। वर्तमान सरकार ने इस चोरी का खुलासा किया। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। आगे उचित कानूनी कार्रवाई होती रहेगी।”



